मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी 66 अनुसूचित जाति और जनजातियों की संशोधित सूची में धनगर समाज की पहचान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सूची में अंग्रेज़ी में ‘Dhangar’ और हिंदी में ‘धंगड़’ लिखा गया है, जिससे समाज में गहरा आक्रोश है।
धनगर समाज उत्थान समिति के मंडल अध्यक्ष रवि कुमार धनगर ने शासन की इस त्रुटि को लेकर जिला अधिकारी उमेश मिश्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि हिंदी में ‘धंगड़’ शब्द को बदलकर ‘धनगर’ किया जाए, जो कि संविधान में भी 1950 से वर्णित है।
रवि कुमार ने भाजपा पर वोट लेकर समाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता समाज के नाम पर वोट तो लेते हैं लेकिन उनके हितों की रक्षा नहीं करते। उन्होंने कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल, विधायक मिथिलेश पाल और राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये नेता समाज के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कपिल देव अग्रवाल ने जाति प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर वोट मांगे, लेकिन आज समाज की इस समस्या पर कोई आवाज नहीं उठा रहे। रवि धनगर ने चेतावनी दी कि यदि गलती नहीं सुधारी गई, तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा और आगामी चुनाव में BJP को वोट नहीं दिया जाएगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ‘धनगर’ जाति संविधान की अनुसूचित जातियों की सूची में 27वें स्थान पर दर्ज है, जबकि शासन की संशोधित सूची में हिंदी में इसे ‘धंगड़’ दर्शा दिया गया, जो ऐतिहासिक रूप से और संवैधानिक रूप से गलत है।
इस विरोध प्रदर्शन में नकली सिंह धनगर, लोकेश धनगर, आनंद धनगर, सतीश धनगर, विनय प्रमुख सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।











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