मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज लगातार दूसरे दिन पूरे प्रदेश में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक तीन घंटे का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया। संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निजीकरण को अरबों रुपये के घोटाले की साजिश करार दिया है।
संघर्ष समिति का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों पर जबरन हड़ताल थोपने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी भी प्रकार की हड़ताल की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन और शासन स्तर पर जनपदों को हड़ताल से निपटने के लिए भ्रामक आदेश जारी कराए जा रहे हैं। इससे ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति फैल रही है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
संघर्ष समिति ने अमेरिका में पेनल्टी झेल चुकी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट कंपनी ग्रांट थॉर्टन को अवैध रूप से नियुक्त करने का आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि अब उसे क्लीन चिट देने के उद्देश्य से निदेशक वित्त निधि नारंग को कार्य विस्तार दिया जा रहा है, जबकि नए निदेशक वित्त पुरुषोत्तम अग्रवाल ने इस प्रक्रिया में संभावित घोटालों को देखते हुए कार्यभार ग्रहण करने से मना कर दिया है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों को महज कुछ हजार करोड़ में निजी कंपनियों को बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं, 42 जनपदों की भूमि मात्र एक रुपये की लीज पर देने का निर्णय भी किया गया है। समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘खुली लूट’ करार देते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, आजमगढ़, मिर्जापुर, बस्ती, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कानपुर, केस्को, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, रायबरेली, ओबरा, अनपरा, पिपरी, परीक्षा, हरदुआगंज, जवाहरपुर और पनकी सहित सभी प्रमुख जनपदों में बिजली कर्मियों ने सामूहिक प्रदर्शन किया।
संघर्ष समिति ने दावा किया कि यह आंदोलन उपभोक्ताओं को साथ लेकर लड़ा जा रहा है, इसीलिए किसी प्रकार की सेवाएं बाधित नहीं की गई हैं। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि कर्मचारियों पर उत्पीड़न जारी रहा तो भीषण गर्मी में उपजने वाली स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।










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