लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश सिंह चौहान के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह से मिला।
लोक भवन स्थित उनके कार्यालय में हुई इस बैठक में किसानों ने 29 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत ज्ञापन सौंपा और राज्यभर के किसानों से जुड़ी जमीनी समस्याओं को सामने रखा। मुख्य सचिव ने गंभीरता से सभी मांगें सुनीं और तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करते हुए समाधान का भरोसा दिलाया।
बैठक में किसान नेताओं ने बताया कि प्रदेश के किसान आज भी भुगतान, बीज-खाद की गुणवत्ता, बिजली, मवेशियों से नुकसान, चकबंदी में भ्रष्टाचार, फसल बीमा, मंडी व्यवस्था, नस्ल सुधार जैसे तमाम मुद्दों से जूझ रहे हैं।
राजेश सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों के हित में बने कानून और योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हैं, जिससे किसानों में आक्रोश है।
मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने बैठक में शामिल सभी विभागीय अधिकारियों को किसानों की शिकायतों का प्राथमिकता पर निराकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। विशेष रूप से खतौनी में त्रुटियों के निस्तारण हेतु गांव-स्तर पर चौपाल आयोजित करने और विभागीय समन्वय से समाधान निकालने की बात कही गई। मुजफ्फरनगर के गांव पुर बालियान समेत कई गांवों में चकबंदी की समीक्षा के भी उन्होंने निर्देश दिए ।
मांग कि गन्ना किसानों का बकाया 3,000 करोड़ रुपये तत्काल दिलाया जाए, विलंब भुगतान पर ब्याज मिले। पायरिला, रेड रॉट, टॉपबोरर जैसी बीमारियों पर शोध और रोकथाम हेतु योजना बने। गन्ना की एक ही वैरायटी को बढ़ावा देना रोका जाए। सब्जियों की सप्लाई चेन विकसित की जाए। मुफ्त बिजली योजना को स्पष्ट किया जाए, HP आधारित सीमा तय हो। गन्ना क्षेत्रों में सिंगल फेज विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। NCR क्षेत्र में ट्रैक्टरों को NGT से छूट दिलाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए। खतौनी में अंश निर्धारण व नाम की गलतियों को गांव स्तर पर ठीक किया जाए। भ्रष्ट तहसील स्टाफ का तबादला हो, कार्य न करने पर कार्रवाई सुनिश्चित हो। अन्ना प्रथा पर रोक, जंगली जानवरों से निजात हेतु व्यापक योजना बनाई जाए। पशुपालन संकट से उबरने हेतु संरचनात्मक सुधार हों। थैमैला व बांझपन पर शोध हो, वैक्सीन बनाई जाए। नस्ल सुधार कार्यक्रम को संस्थागत रूप दिया जाए। नकली सीमेन व पशु आहार पर रोक के लिए कानून बने।
श्रावस्ती में सीओ चकबंदी की जांच स्वतंत्र समिति से कराई जाए। शेरपुर लवल गांव की चकबंदी तत्काल निरस्त की जाए। कृषि से विमुख हो रहे किसानों को वापस जोड़ने हेतु विस्तार सेवाएं मजबूत की जाएं। कीटनाशकों का वर्गीकरण और मूल्य निर्धारण हो। खाद-बीज में मिलावट पर कड़ी निगरानी हो, किसानों को गुणवत्ता मिले। नोएडा क्षेत्र के किसानों को बकाया मुआवजा व भूमि आवंटन शीघ्र मिले। मूंगफली खरीद नीति बने, किसानों का शोषण रोका जाए। फसल बीमा योजना की समयसीमा और प्रक्रिया किसानहित में बदली जाए। मंडियों को आधुनिक बनाया जाए, वैल्यू एडिशन की व्यवस्था हो।
धर्मेंद्र मलिक (राष्ट्रीय प्रवक्ता), मांगेराम त्यागी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), महेंद्र सिंह रंधावा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), उम्मेद सिंह (राष्ट्रीय सचिव), हरिनाम सिंह (प्रदेश अध्यक्ष), रामस्वरूप वर्मा (पूर्वांचल प्रभारी), राजकुमार तोमर (मंडल अध्यक्ष, आगरा), बलराम तिवारी (बुंदेलखंड प्रभारी), बब्लू दूबे (प्रयागराज मंडल अध्यक्ष), बलबीर सिंह और राजेश रावत (जिलाध्यक्ष, लखनऊ) समेत अन्य किसान नेता बैठक में मौजूद रहे।










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