मोहाली: मोहाली स्थित सीबीआई की विशेष कोर्ट ने कुख्यात मोगा सेक्स स्कैंडल मामले में पंजाब के 4 पूर्व पुलिस अधिकारियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। पिछली सुनवाई पर तत्कालीन एसएसपी दविंदर सिंह गरचा, पूर्व एसपी हेडक्वार्टर मोगा परमदीप सिंह संधू, मोगा सिटी थाने के पूर्व एसएचओ रमन कुमार और मोगा के सिटी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह को दोषी करार दिया था।
विशेष न्यायाधीश-द्वितीय राकेश गुप्ता के सुनाए फैसले में भ्रष्टाचार व जबरन वसूली में सभी को दोषी माना। दोषियों को सजा के साथ कोर्ट ने दो-दो लाख रुपये जुर्माना भी किया है। पूर्व एसएचओ रमन कुमार को फिरौती एक्ट की धाराओं के तहत 3 साल की और सजा सुनाई और एक लाख रुपये जुर्माना किया। दोषियों के खिलाफ रणजीत सिंह ने केस दायर किया था। कोर्ट ने देविंदर सिंह गरचा और पीएस संधू को भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के साथ धारा 13(2) के तहत दोषी पाया।
इसी तरह रमन कुमार और अमरजीत सिंह को पीसी अधिनियम व भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 384 (जबरन वसूली) के समान प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया है। अमरजीत सिंह को धारा 384 के साथ धारा 511 आईपीसी के तहत भी दोषी ठहराया गया है। अकाली नेता तोता सिंह के बेटे आरोपी बरजिंदर सिंह उर्फ मक्खन और सुखराज सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है।
यह मामला 2007 में उस समय सामने आया था, जब राज्य में अकाली-भाजपा सरकार थी। मोगा के थाना सिटी ने जगराओं के एक गांव की लड़की की शिकायत पर गैंगरेप का मामला दर्ज किया था। इसके बाद पीड़ित लड़की के धारा-164 के बयान दर्ज किए। इसमें उसने करीब 50 अज्ञात लोगों पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने इस केस की जांच में ब्लैकमेलिंग करनी शुरू कर दी थी। उन्होंने केस में कई व्यापारियों और राजनेताओं के नाम शामिल करने शुरू कर दिए।
इसी दौरान मोगा के भागी गांव के रंजीत सिंह ने एसएचओ अमरजीत सिंह द्वारा 50 हजार रुपए मांगने की ऑडियो रिकॉर्ड कर ली। उसको धमकी दी गई थी कि भुगतान न करने की स्थिति में महिला मनप्रीत कौर की शिकायत दर्ज कर बलात्कार के मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। रंजीत ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) को इसकी शिकायत की।
इसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया था। जब इस मामले में राजनेताओं और व्यापारियों के नाम आने लगे, मीडिया में यह केस सुर्खियों बनने लगा तो 12 नवंबर 2007 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया। साथ ही पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद सारे केस की जांच करने के बाद हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया था।
इस मामले में मनप्रीत कौर नाम की महिला को सरकारी गवाह बनाया गया। हालांकि, बाद में कोर्ट ने उसे विरोधी घोषित किया। इस वजह से उसके खिलाफ मोहाली कोर्ट में अलग से कार्रवाई शुरू हुई। इसके अलावा रणबीर सिंह उर्फ राणू और करमजीत सिंह सरकारी गवाह बने। इस मामले में सरकारी गवाह बनी मनजीत कौर जीरा के पास नाम बदलकर रह रही थी। उस समय वह गर्भवती थी। सितंबर 2018 में उसकी और उसके पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस पूरे मामले में 2007 में एफआईआर दर्ज कराने वाली नाबालिग लडक़ी के विरुद्ध किशोर न्यायालय में एक अलग मामला लंबित है।










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