मुजफ्फरनगर। मीरापुर में गंगा किनारे संरक्षित क्षेत्र हैदरपुर वेटलैंड एक बार फिर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है। इस बार मामला प्रतिबंधित खैर के सौ से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ा है। लकड़ी तस्करों द्वारा किए गए इस कृत्य ने न केवल वन क्षेत्र को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, खैर की लकड़ी से बनने वाले कत्था की कीमत बाजार में ₹10,000 प्रति कुंतल तक है, जो तस्करों के लिए अत्यधिक लाभदायक सौदा साबित होती है। तस्करों ने 50 से 250 सेंटीमीटर तक के हरे-भरे खैर के पेड़ों को बेरहमी से काट डाला। सबूत छिपाने के लिए उन्होंने पेड़ों की जड़ों को मिट्टी से ढकने की कोशिश भी की।
मुख्य वन संरक्षक के निर्देश पर डीएफओ कन्हैया लाल पटेल के नेतृत्व में शुकतीर्थ रेंजर कुलदीप सिंह, वन दरोगा नंदकिशोर व पुनीत कुमार की टीम ने मौके पर पहुंचकर कटे पेड़ों की गिनती और माप की। जांच के दौरान मीरापुर क्षेत्र की एक आरा मशीन पर छापा मारा गया, जहां से करीब 10 कुंतल खैर की लकड़ी बरामद की गई। आरा मशीन को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है और उसके संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
डीएफओ कन्हैया लाल पटेल ने कहा कि यदि इस अवैध कटाई में किसी वनकर्मी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खैर जैसे प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई पूरी तरह अवैध है जब तक कि इसके लिए विभागीय अनुमति न ली गई हो।
इस घटना ने वन क्षेत्र में सुरक्षा तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर किया है। विभाग द्वारा क्षति का आकलन किया जा रहा है और दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है।










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