मुजफ्फरनगर। देश के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2011 से पहले नियुक्त हुए हजारों शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से छूट दिलाने की मांग ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। मुजफ्फरनगर के कद्दावर सांसद हरेंद्र मलिक ने इस मुद्दे पर शिक्षकों को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए ऐलान किया है कि यह लड़ाई अब दिल्ली की संसद से लेकर उत्तर प्रदेश की सड़कों तक पूरी मजबूती के साथ लड़ी जाएगी।
धर्मेंद्र यादव की पहल का स्वागत, भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ ने जताया आभार-
भाकियू (टिकैत) शिक्षक प्रकोष्ठ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को सांसद हरेंद्र मलिक से उनके आवास पर मुलाकात की। शिक्षकों ने संसद में इस मुद्दे को उठाने और संशोधन बिल लाने के प्रयासों के लिए समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया। जिलाध्यक्ष रामरतन, प्रदेश महासचिव मनीष गोयल और महामंत्री अमित शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों ने सांसद मलिक को एक पत्र सौंपकर इस संघर्ष को और तेज करने की अपील की।
सांसद हरेंद्र मलिक का बड़ा आश्वासन-
प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा, “शिक्षक राष्ट्र का निर्माता है और उनके साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र यादव ने जो पहल संसद में शुरू की है, हम उसे तार्किक परिणति तक पहुँचाएंगे। हम सदन के अंदर सरकार को घेरेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरकर शिक्षकों के हक की आवाज बुलंद करेंगे।” उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि 2011 से पहले नियुक्त अध्यापकों को अनुभव के आधार पर TET से छूट दिलाना हमारा संकल्प है।
न्याय की मांग और भावी रणनीति-
सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने भी इस मांग को पूरी तरह न्यायसंगत बताते हुए सरकार से इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की। भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों—अमित तोमर और अमित शर्मा—ने कहा कि यदि सरकार ने पुराने शिक्षकों को राहत नहीं दी, तो यह आंदोलन व्यापक रूप लेगा।
क्या है मुख्य विवाद?
दरअसल, 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए TET नियमों की अनिवार्यता के कारण उनके प्रमोशन और सेवा संबंधी लाभों पर संकट मंडरा रहा है। शिक्षक इसे ‘बैकडेट’ से नियम थोपना बता रहे हैं, जिसका सांसद हरेंद्र मलिक और समाजवादी पार्टी अब मुखर विरोध कर रही है।
इस मुलाकात के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे, जिन्होंने सांसद के आश्वासन के बाद उम्मीद जताई है कि अब देश के ‘गुरुजनों’ को उनका खोया हुआ सम्मान वापस मिलेगा।










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