मेरठ। आज एडीजी मेरठ जोन एवं डीआईजी मेरठ रेंज की अध्यक्षता में रिजर्व पुलिस लाइन मेरठ के बहुउद्देश्यीय हॉल में नगरीय क्षेत्र के 100 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों, ग्रामीण क्षेत्र के 100 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों, नगरीय क्षेत्र के 150 हेड कांस्टेबल/कांस्टेबलों एवं ग्रामीण क्षेत्र के 150 हेड कांस्टेबल/कांस्टेबलों को बीट बुक वितरित की गई। इस दौरान जिले की कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में बीट व्यवस्था को प्रभावी बनाने हेतु समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी में बीट की महत्ता, इसकी संरचना और बीट आरक्षी के कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बीट पुलिस व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई होती है, जिसका प्रभार एक आरक्षी के पास होता है। कई बीट मिलकर चौकी या हल्का क्षेत्र बनाते हैं, जिनका प्रभारी उपनिरीक्षक होता है। बीट आरक्षी का काम अपने क्षेत्र के ग्राम/मोहल्लों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे अपराधी, अवैध शराब के अड्डे, भूमि विवाद आदि संकलित करना और थाने को सूचित करना होता है।
जनपद में प्रत्येक थाना क्षेत्र को छोटी-छोटी बीटों में विभक्त किया गया है, जहां प्रत्येक बीट में लगभग चार ग्राम या मोहल्ले आते हैं। बीट आरक्षी को अपनी बीट से जुड़ी सारी जानकारी बीट पुस्तिका में दर्ज करनी होती है। इस व्यवस्था के तहत नगर क्षेत्र में 1097 और ग्रामीण क्षेत्र में 1700 जनसंख्या के हिसाब से एक आरक्षी तैनात किया गया है।
बीट प्रणाली के नवाचार के तहत पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद और विश्वास स्थापित करना लक्ष्य है। प्रभावी बीट व्यवस्था के माध्यम से पुलिसकर्मी अपने क्षेत्र के प्रतिनिधि एवं मित्र बनकर जनता के सहयोग से कानून व्यवस्था बनाए रखते हैं।
बीट बुक सात भागों में विभाजित है, जिसमें भौगोलिक विवरण, प्रमुख व्यक्तियों के नाम, विवाद/शत्रुता, आपराधिक ठिकानों का विवरण, प्रथम सूचना रिपोर्ट, अपराधियों की पतारसी और प्रार्थना पत्रों की जांच शामिल है।
गोष्ठी में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी, 200 प्रशिक्षणाधीन उपनिरीक्षक और 300 मुख्य आरक्षी/आरक्षी उपस्थित थे। इसके बाद रिजर्व पुलिस लाइन के छात्रावासों और परिवहन शाखा का निरीक्षण भी किया गया और आवश्यक निर्देश दिए गए।











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