भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बीच भारतीय सेना ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी ताकि सीमा पर सतर्कता का स्तर कम किया जा सके। यह फैसला 10 मई को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी सहमति के बाद लिया गया है। भारतीय सेना की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने की समझौता अब 18 मई तक बढ़ा दी गई है।
भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल्स ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) ने 10 मई को बात की थी और तय किया था कि दोनों ओर से सैन्य कार्रवाई रोकी जाएगी। यह फैसला तब हुआ जब दोनों देशों के बीच चार दिन तक भीषण गोलीबारी और हमले हुए, जिससे एक बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी। भारतीय सेना ने एक बयान में कहा, ’10 मई की बातचीत के आधार पर यह तय किया गया है कि हम भरोसा बढ़ाने वाले कदम जारी रखेंगे ताकि सीमा पर सतर्कता कम की जा सके। जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, हम आपको सूचित करते रहेंगे।’
वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि 15 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच फिर से हॉटलाइन पर बातचीत हुई और उन्होंने “सीजफायर” की अवधि 18 मई तक बढ़ाने पर सहमति जताई। डार के मुताबिक, 10 मई की बातचीत में युद्धविराम 12 मई तक तय हुआ था। फिर, 12 मई को बातचीत में इसे 14 मई तक बढ़ाया गया। वहीं 14 मई को फिर बातचीत में इसे 18 मई तक बढ़ाया गया। हालांकि भारत ने 14 मई की बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
भारतीय सेना के अनुसार, ‘दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि एक भी गोली नहीं चलाई जाएगी और कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं होगी।’ इसके साथ ही यह भी सहमति बनी कि सीमा और अग्रिम इलाकों से फौजों की संख्या घटाने पर विचार किया जाएगा। वहीं भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 11 मई को बताया था कि दोनों देशों ने ‘जमीन, समुद्र और हवा में सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयां रोकने’ पर सहमति बना ली है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 मई को जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और वहां की सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया। श्रीनगर के बडामी बाग कैंटोनमेंट में सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को नए सिरे से परिभाषित किया है। अब भारत की नीति है कि भारतीय जमीन पर कोई भी हमला युद्ध माना जाएगा।’ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की अब तक की सबसे बड़ी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताया और कहा, ‘ये केवल बचाव नहीं था, बल्कि साहसिक निर्णय लेकर किया गया जवाब था। आतंकियों ने हमारे लोगों को धर्म देखकर मारा, हमने उन्हें उनके कर्मों की सजा दी। यह हमारा धर्म था।’
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकियों के ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पाहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की, जिनका भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया। इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा जिनमें एयर बेस, रडार साइट्स, और कमांड सेंटर शामिल हैं।











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