नई दिल्ली। बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने दो महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी पहली और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। भारत ने न केवल अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर अपनी कड़ी चिंता जाहिर की है, बल्कि बीएनपी नेता तारिक रहमान की स्वदेश वापसी को लोकतंत्र की बहाली से जोड़कर देखा है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया की मुख्य बातें:
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सर्वोपरि: भारत ने स्पष्ट कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों सहित अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी शत्रुता और हिंसा “गंभीर चिंता का विषय” है। भारत ने पड़ोसी देश के घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखने की बात दोहराई है।
तारिक रहमान की वापसी पर रुख: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की 17 साल बाद लंदन से हुई स्वदेश वापसी पर भारत ने कहा कि वह वहां “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों” का समर्थन करता है और इस घटनाक्रम को इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। कौन हैं तारिक रहमान और क्यों अहम है उनकी वापसी?
तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं और 2008 से लंदन में निर्वासन में थे। उन पर 2004 के ढाका ग्रेनेड हमले और भ्रष्टाचार के कई मामलों में सजा सुनाई गई थी, जिसे उनकी पार्टी (बीएनपी) राजनीतिक प्रतिशोध मानती है। उनकी वापसी से बीएनपी में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, लेकिन उनके सामने देश को हिंसा और अस्थिरता से बाहर निकालने की बड़ी चुनौती है।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
फरवरी 2025 के चुनाव: बांग्लादेश में फरवरी में चुनाव होने वाले हैं। भारत के करीब मानी जाने वाली ‘अवामी लीग’ फिलहाल चुनाव नहीं लड़ रही है। बदले हुए समीकरण: अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी और कट्टरपंथी ‘जमात-ए-इस्लामी’ की सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय है।
बीएनपी के प्रति बदलता नजरिया: भारत को लगता है कि जमात और अन्य कट्टरपंथी ताकतों के मुकाबले बीएनपी एक अपेक्षाकृत उदार और लोकतांत्रिक विकल्प हो सकती है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। भारत का यह बयान संकेत देता है कि वह बांग्लादेश में केवल लोकतांत्रिक स्थिरता ही नहीं, बल्कि वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा की भी गारंटी चाहता है।











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