मुजफ्फरनगर। पिछले रविवार को शेरनगर क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान बह जाने के बाद लापता हुए तीन वर्षीय अवि का शव उसकी मौत के चौथे दिन बुधवार को एक तालाब की झाड़ियों में फंसा हुआ बरामद किया गया। यह हादसा न सिर्फ एक मासूम की जिंदगी लील गया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की पोल भी खोल गया। शव मिलने की खबर से पूरे इलाके में मातम फैल गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और उन्होंने इस त्रासदी के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
यह हृदयविदारक घटना रविवार सुबह की है जब नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के शेरनगर गांव निवासी राहुल प्रजापति का 3 वर्षीय पुत्र अवि बारिश के दौरान घर के पास अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। उसी समय अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि अवि पैर फिसलने से पास के नाले में जा गिरा। यह नाला करीब 100 मीटर दूर एक बड़े तालाब में जाकर खुलता है। देखते ही देखते बच्चा पानी में बहता चला गया और आंखों से ओझल हो गया।
घटना की सूचना पर तुरंत स्थानीय पुलिस, गोताखोरों, फ्लड टीम, मछुआरों व PAC की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। पूरे चार दिन तक बच्चें को खोजने की हरसंभव कोशिश की गई। मंगलवार को पीएसी की यूनिट लौट चुकी थी लेकिन बुधवार को जब तालाब की झाड़ियों की सफाई की जा रही थी, उसी दौरान एक झाड़ी काटते वक्त शव पानी में ऊपर तैर आया। थाना प्रभारी दिनेश चंद बघेल ने बताया कि शव पूरी तरह से सड़ चुका था, जिसे कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
मृतक अवि के दादा जितेंद्र ने बताया कि वे दो दिन से लगातार अधिकारियों से डॉग स्क्वायड मंगवाने की मांग कर रहे थे, लेकिन अफसर इस सुझाव को “फिल्मी डायलॉग” कहकर हंसी में उड़ा देते रहे। उन्होंने बताया कि बच्चे का शव उसी स्थान पर मिला है जहां से कुत्ते लगातार सूंघते हुए आ-जा रहे थे और रुक जाते थे। उन्होंने कहा, “अगर हमारी बात पर समय रहते ध्यान दिया गया होता तो शायद बच्चा पहले ही मिल जाता।”
स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि गांव में नाले और तालाब की सफाई वर्षों से नहीं हुई है। जगह-जगह झाड़ियां उगी हुई हैं और जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। अवि की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि किस हद तक सिस्टम संवेदनहीन हो चुका है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव के अंदर स्थित इस पुराने तालाब को खत्म कर गांव के बाहर नया तालाब बनाया जाए, ताकि जल निकासी व्यवस्थित हो और भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया है। मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई न होने के कारण शव झाड़ियों में फंसा रहा और खोज अभियान असफल रहा।
वहीं, क्षेत्रीय सांसद हरेंद्र मलिक ने इस घटना पर दुख जताते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के प्रतिनिधि के रूप में जितेंद्र कुच्छल मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जिला पंचायत सदस्य तरुण पाल ने कहा कि इस तालाब की सफाई और सुरक्षा को लेकर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ वार्ता की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी।
अवि की मौत ने प्रशासन की लापरवाही, जल निकासी व्यवस्था की बदहाली और गांवों में बुनियादी सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर कर दिया है। चार दिन की मशक्कत के बाद भी जब शव ग्रामीणों की नजर और जानवरों की संवेदनशीलता से बरामद हुआ, तो यह सवाल उठाना लाजमी है कि क्या संवेदनशील तंत्र महज कागजों तक ही सीमित रह गया है? प्रशासन को न केवल जवाब देना होगा, बल्कि भविष्य के लिए ठोस और टिकाऊ समाधान भी तैयार करने होंगे।










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