नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी तक दे दी है. अगर इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध लंबा चलता है और टकराव बढता है तो इससे भारत को बड़ा नुकसान हो सकता है. भारत का ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और यमन के साथ सालाना 41.8 अरब डॉलर (लगभग ₹3.55 लाख करोड़) से अधिक का व्यापार खतरे में पड़ जाएगा. युद्ध से अगर समुद्री मार्गों, बंदरगाहों या वित्तीय प्रणाली में कोई रुकावट आती है तो इससे भारत का व्यापार प्रवाह प्रभावित होगा और इससे माला भाड़ा और समुद्री जहाजों की बीमा लागत तो बढेगी ही आपूर्ति श्रृंखला पर जोखिम भी बढ जाएगा.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, होर्मुज़ जलडमरूमध्य तथा रेड सी में इस युद्ध के लंबा खिंचने पर उत्पन्न होने वाली बाधाओं से भारत चिंतित है. अभी तक तो भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार (जो पिछले वित्त वर्ष में 220 अरब डॉलर से अधिक था) पर असर नहीं पड़ा है, लेकिन आगे भी इससे इंडियन ट्रेड प्रभावित नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है.
वित्त वर्ष 2025 में भारत का पश्चिम एशिया के अन्य देशों जैसे ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और यमन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 41.8 अरब डॉलर रहा. इसमें से ईरान और इजराइल के साथ व्यापार केवल 5.4 अरब डॉलर था. यानी अन्य पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध अच्छे हैं. ईरान कभी भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहा है और चाबहार बंदरगाह को भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए रणनीतिक मार्ग मानता है. वहीं भारत अमेरिका, इज़राइल और खाड़ी अरब देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हुए है, जो अब इस संघर्ष में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं.
भारत दो-तिहाई कच्चे तेल और आधे एलएनजी (LNG) का आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होता है. रेड सी के बाब-एल-मंडेब मार्ग से भारत का लगभग 30% निर्यात यूरोप, उत्तर अफ्रीका और अमेरिका के पूर्वी तट की ओर होता है. ऐसे में इन दोनों मार्गों पर खतरे से व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होता है तो क्रूड ऑयल की कीमतें बढेंगी, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा, महंगाई तेज़ होगी और देश की राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ेगा. शिपिंग बीमा और माल भाड़ा दरें भी बढ़ेंगी. इसका असर भारत का एशिया और यूरोप के साथ समग्र व्यापार पर होगा.
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, कच्चे तेल के दाम में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई में सालाना 35 बेसिस पॉइंट की वृद्धि होती है. सरकार विकल्पों की तलाश में है. भारत यूरोप और अमेरिका के साथ व्यापार के लिए पूर्वी मार्गों पर विचार कर रहा है और आपूर्ति बाधा से बचने के लिए रूस से अधिक तेल खरीदने की योजना बना रहा है.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा तो यह पूरे खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव का कारण बन सकता है. ऐसा होने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत जैसी ऊर्जा-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर पड़ेगा. भारत की ईरान के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से गहरी साझेदारी है.











Discussion about this post