नई दिल्ली : मौसम विभाग ने 11 जून तक मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। हालांकि, 12 जून से एक बार फिर बादलों की आवाजाही के साथ तेज हवाएं आंधी और बारिश के संकेत हैं। लिहाजा, बीच के दिनों में हरियाणा-पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और दिल्ली-एनसीआर में बारिश का अनुमान नहीं है। इस दौरान प्रचंड गर्मी परेशानी का सबब बनेगी। आईएमडी ने महाराष्ट्र, दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। उधर, पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बारिश का दौर थमने से बाढ़ जैसी समस्या से काफी राहत है। मुंबई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम के लिहाज से अगले 4 से 5 दिन काफी भारी रहने वाले हैं। मौसमी गतिविधियां सुस्त पड़ने से अधिकतम तापमान बढ़ रहा है। खासकर, उत्तर भारत के राज्यों में इसका असर अधिक देखने को मिलेगा और गर्मी से हाल बेहाल होगा। यानी 12 जून से पहले बिहार, यूपी, राजस्थान, हरियाणा-पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पहुंच सकता है। हालांकि, 12 जून से एक बार फिर बादलों की आवाजाही के साथ तेज हवाओं के साथ बारिश दस्तक देगी, जिससे लोगों को प्रचंड गर्मी से काफी राहत मिलेगी। यह दौर करीब सप्ताह भर चलता रहेगा। लेकिन, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल मेहरबान रहेंगे। मौसम विभाग के मुताबिक, पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बादलों की आवाजाही जारी रहेगी, लेकिन बारिश के चांस कम हैं। उधर, दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम मेहरबान रहेगा।
खासकर, केरल में मानसून के एक्टिव रहने से अन्य राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। हालांकि, ये गतिविधियां बेहद कम गति से होंगी। लेकिन, अगले सप्ताह से इसमें तेजी आएगी और मूसलाधार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ेगा। कमोबेश यही पूर्वोत्तर के राज्यों में देखने को मिलेंगे। सप्ताहांत तक सिक्किम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में मानसून के पहुंचने से बारिश के स्तर में काफी तेजी आएगी। मुंबई में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश भी गर्म हवाओं से झुलस रहा है। मौसम विभाग ने अगले 3 से 4 दिन मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान तापमान बढ़ोतरी के साथ लोगों को भीषण गर्मी का एहसास होगा। लेकिन, 11 जून से मौसम करवट लेगा और कई जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश माहौल खुशनुमा बना देगी। इस दौरान तेज गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की जा रही है। लिहाजा, लोगों को सावधान रहने की जरूरत होगी। 12 और 13 जून को लखनऊ, देवरिया, गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर, बहराइच, बलरामपुर, कुशीनगर और प्रयागराज समेत पश्चिमी जिलो में करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं बहेंगी, जिससे मौसम काफी सुहावना होगा।
दिल्ली-एनसीआर में आसमान से आग बरस रही है। महज तीन दिन मौसम शुष्क रहने से अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को क्रॉस कर गया है। तेज गर्म हवाएं परेशानी का सबब बन रही हैं। तेज धूप और उमस से हाल बेहाल है। मौसम विभाग ने अगले 2 से 3 दिन आसमान साफ रहने के संकेत दिए हैं। लेकिन, बीच-बीच में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चल सकती है। सोमवार और मंगलवार को भी धूल भरी आंधी आने के संकेत हैं। मंगलवार को पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। लेकिन, 12 जून से एक बार आसमान बादलों का डेरा होगा और हवाओं के झोंकों के साथ बारिश मौसम को खुशनुमा बनाएंगी।
बिहार में मौसम का रुख कड़ा है। फिलहाल, 2 से 3 दिन तक भीषण गर्मी परेशान करेगी। लेकिन, आईएमडी ने करीब 14 जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना व्यक्त की है। लेकिन, बारिश का स्तर काफी धीमा होगा। अधिकतर जिलों में मौसम सामान्य रहेगा। मानसून को लेकर संभावनाएं चल रही हैं, हो सकता है मध्य जून तक मानसून एंट्री ले और तेज बारिश का दौर शुरू हो।
राजस्थान के अधिकांश इलाके एक बार फिर लू की चपेट में हैं और गंगानगर में रविवार को अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। मौसम विभाग ने राज्य में भीषण गर्मी का दौर अभी जारी रहने का अनुमान जताया है। गंगानगर में रविवार को अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री, बीकानेर में 46 डिग्री, बाड़मेर में 45.9 डिग्री, चूरू में 45.6 डिग्री, फलोदी में 45.4 डिग्री, जैसलमेर में 45.2 और कोटा में 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जयपुर स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, आने वाले एक सप्ताह के दौरान राज्य के अधिकांश भागों में मौसम शुष्क रहेगा। उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग में 11 जून तक अधिकतम तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस रहने और कुछ स्थानों पर लू चलने का पूर्वानुमान जताया है। विभाग ने बीकानेर संभाग और आसपास के इलाकों में आठ से 10 जून के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूल भरी हवाएं चलने का अनुमान जताया है।
पहाड़ी राज्यों में भी अभी मौसम का रुख नरम है। मौसम विभाग ने फिलहाल बारिश होने की कोई चेतावनी जारी नहीं की। लेकिन, 11 से 13 जून के बीच भारी बारिश का पूर्वानुमान है। इस दौरान जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों में जमकर बादल बरसेंगे और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं बहेंगी, जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलेगी।
झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून के जून के मध्य में पहुंचने की संभावना है। 10 जून के बाद मानसून की प्रगति में तेजी आने की संभावना है। इस साल मानसून ने तय समय से एक सप्ताह पहले 24 मई को केरल में दस्तक दी। आम तौर पर, दक्षिण-पश्चिमी मानसून एक जून तक केरल में दस्तक देता है और आठ जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाता है।झारखंड में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि 10 जून है। हालांकि, मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 2010 से झारखंड में मानसून का आगमन 12 जून से 25 जून के बीच हो रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘झारखंड में 12 जून से पहले मानसून के पहुंचने की संभावना नहीं है। अगर स्थिति अनुकूल रही तो जून के मध्य तक इसके पहुंचने की उम्मीद है। झारखंड में फिलहाल पश्चिमी हवा चल रही है। आनंद ने कहा, ‘‘जब तक यह पूर्वी हवा में नहीं बदल जाती और नमी लेकर नहीं आती, तब तक राज्य में मानसून के आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। राज्य में 10 जून के बाद पूर्वी हवा चलने की संभावना है जो मानसून की प्रगति में मदद कर सकता है।’’
असम में बाढ़ की स्थिति में लगातार सुधार के साथ राज्य के 12 जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की जनसंख्या घटकर अब लगभग 3.37 लाख रह गई है और प्रभावित क्षेत्र का दायरा भी कम हुआ है। आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, इस साल बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक कुल 23 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें कहा गया कि ब्रह्मपुत्र सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर घट रहा है, हालांकि इनमें से कुछ अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
शनिवार शाम तक धुबरी में ब्रह्मपुत्र नदी, धरमतूल में कोपिली नदी, बीपी घाट क्षेत्र में बराक नदी तथा श्रीभूमि में कुशियारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं। आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, बाढ़ से 12 जिलों के कुल 3,37,358 लोग प्रभावित हुए हैं, जिसमें श्रीभूमि में सबसे अधिक 1.93 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। बुलेटिन में कहा गया कि हैलाकांडी में 73,724 और कछार में 56,398 लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं तथा राज्य में 36,000 से अधिक विस्थापित लोग 133 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। 68 राहत वितरण केंद्र भी कार्यरत हैं। राज्य में 12,659 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।











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