बिजनौर। मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर दर्जनों ग्रामीणों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी जसजीत कौर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि हेमराज बैराज कॉलोनी मार्ग पर अंडरपास न होने से उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी खतरे में है। यह ज्ञापन सात महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सौंपा गया, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर अपनी चिंताएँ साफ़ ज़ाहिर कीं।
ग्रामीणों ने बताया कि बैराज से रावली तक लगभग 25 गांव इसी मार्ग से जुड़े हुए हैं। यह सड़क किसानों, मजदूरों, पशुपालकों और आम नागरिकों के लिए जीवनरेखा है। लेकिन अब यह मार्ग भारी यातायात के कारण खतरनाक बन चुका है। हर दिन सैकड़ों ट्रक और ट्रैक्टर गुजरते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को सड़क पार करना चुनौती बन गया है। ग्रामीणों ने कहा- “हम हर रोज मौत के साए में जी रहे हैं।”
ग्रामीणों का धरना पिछले 6-7 महीनों से लगातार जारी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। हाल ही में एनएचएआई (NHAI) अधिकारियों के साथ हुई बैठक में केवल सर्विस लेन और यू-टर्न की अनुमति दी गई थी। ग्रामीणों ने इसे अपर्याप्त बताया और कहा कि ये उपाय सुरक्षा के मूल प्रश्न का हल नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक अंडरपास नहीं बनेगा, तब तक दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा।
स्थानीय किसानों ने बताया कि उनकी कई जमीनें हाईवे के दूसरी ओर हैं। उन्हें खेतों तक पहुंचने के लिए रोज यह व्यस्त मार्ग पार करना पड़ता है। भैंसा-बुग्गी, ट्रैक्टर-ट्रॉली और पैदल चलने वाले ग्रामीणों को अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के बीच से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उनकी आजीविका की डोर है, जिसे सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी जसजीत कौर से आग्रह किया कि वे एनएचएआई या संबंधित विभाग को इस मार्ग पर विस्तृत सुरक्षा और यातायात अध्ययन कराने का निर्देश दें। साथ ही अंडरपास निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जल्द से जल्द तैयार कराने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशासन को तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों समाधान तलाशने चाहिए ताकि गांवों की सुरक्षा और विकास साथ-साथ सुनिश्चित हो सके।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदीप अधिकारी, दिलीप अधिकारी, दीपक वाला, मनोरंजन, अमित मंडल, नेपाल मंडल, नकुल हालदार, दिलीप बाला, राहुल शाह, आनंद मंगल, लक्ष्मीकांत, राजेश बड़े, शिव पाल, विवेक विश्वास, आनंद सिकंदर, रोहित मिस्त्री और सुमित समेत दर्जनों ग्रामीण शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि अब वादे नहीं, कार्रवाई चाहिए- वरना आंदोलन को और तेज किया जाएगा।











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