मुजफ्फरनगर। जनपद की हवा में जहर घोलने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का आंदोलन रंग लाया है। भोपा रोड पर किसानों के कड़े विरोध और अर्धनग्न प्रदर्शन के बाद प्रशासन हरकत में आया है। रविवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की टीम ने औद्योगिक क्षेत्र में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिससे मिल मालिकों में हड़कंप मच गया।
प्रदूषण विभाग का एक्शन: सैंपल सीज, सीलिंग की चेतावनी-
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी गिरीश चंद्रा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम ने भोपा रोड स्थित कई बड़ी मिलों पर धावा बोला। जांच के दायरे में प्रमुख रूप से ये इकाइयां रहीं:
शाकुंभरी पल्प
तिरुपति बालाजी फाइबर्स
गर्ग डुप्लेक्स
सिद्धबली पेपर्स
टीम ने मिलों के बॉयलरों में इस्तेमाल हो रहे ईंधन, एयर पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम (APCS) और चिमनियों की सघन जांच की। लखनऊ से आए आरडीएफ (RDF) लदे ट्रकों के सैंपल लेकर लैब भेज दिए गए हैं। अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि ईंधन मानकों के विपरीत पाया गया, तो फैक्ट्रियों को तुरंत सील कर दिया जाएगा।
भाकियू (अ) का आरोप: कचरा जलाकर फेफड़ों में घोला जा रहा जहर-
भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि टीडीएफ (TDF) के नाम पर नगर निगमों का कूड़ा और जहरीले टायर जलाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ बताया। शनिवार को किसानों ने हाईवे पर कूड़े से भरे ट्रकों को घेर लिया था, जिसके बाद प्रशासन ने तीन ट्रकों को जब्त कर पुलिस अभिरक्षा में भेज दिया।
प्रशासन ने शुरू कराया छिड़काव, किसानों ने दी चेतावनी-
किसानों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने भोपा रोड पर प्रदूषण कम करने के लिए एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव शुरू करा दिया है। हालांकि, किसानों ने इसे केवल एक शुरुआत बताया है। धर्मेंद्र मलिक ने साफ कहा कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ स्थगित किया गया है। यदि अवैध कूड़ा जलना बंद नहीं हुआ, तो किसान दोबारा सड़कों पर उतरेंगे।










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