मुजफ्फरनगर। जिले में तब्लीगी जमात और मदरसों से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रशासन द्वारा अनावश्यक पूछताछ और दबाव डाले जाने के आरोप AIMIM ने लगाए हैं। पार्टी के जिला अध्यक्ष इमरान कासमी के नेतृत्व में AIMIM प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि मदरसे और जमात केवल धार्मिक और नैतिक शिक्षा देने, सामाजिक सद्भाव बढ़ाने और मानवता की सेवा करने के उद्देश्य से काम करते हैं। बिना ठोस आधार के की जा रही कार्रवाइयों को धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात बताया गया और चेतावनी दी गई कि इससे समाज में भय और अविश्वास फैल रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहला, जमात और मदरसों के संचालकों, जिम्मेदार व्यक्तियों और छात्रों के प्रति किसी भी तरह की अनावश्यक पूछताछ, उत्पीड़न या दबाव तुरंत रोका जाए। दूसरा, यदि प्रशासनिक जांच आवश्यक हो तो वह विधिसम्मत, सम्मानजनक, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जाए। तीसरा, जिले में भय और अविश्वास को समाप्त करने के लिए प्रशासन स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे ताकि समुदाय में विश्वास पुनः स्थापित हो सके।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है और किसी भी समुदाय को विशेष रूप से निशाना बनाना अनुचित और समाज विरोधी है।
AIMIM के पश्चिम प्रदेश महासचिव इंतज़ार अंसारी ने मीडिया से कहा कि जमात की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए LIU की पूरी टीम को कम से कम चालीस दिन तक जमात में भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाहर से देखकर आरोप लगाना आसान है, लेकिन हकीकत समझने के लिए अनुभव जरूरी है।










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