मुज़फ्फरनगर। जिला कलेक्ट्रेट स्थित चकबंदी कार्यालय में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश महासचिव धीरज लाटियान की अगुवाई में जोरदार हंगामा किया। किसानों ने चकबंदी अधिकारियों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए और कहा कि अधिकारियों द्वारा “बंद लिफाफे” में पैसे लेकर भी काम नहीं किया जाता।
भाकियू कार्यकर्ताओं ने कहा कि किसानों के काम में जानबूझकर देरी की जाती है और उनसे अवैध रूप से धन की मांग की जाती है। गुस्से में आए धीरज लाटियान ने कार्यालय में आकस्मिक छापेमारी की चेतावनी दी, जिससे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
धीरज लाटियान ने आरोप लगाया कि चकबंदी कार्यालय में “रिश्वतखोरी का तंत्र” सक्रिय है। उन्होंने कहा, “यहाँ अलग-अलग ठिये बने हुए हैं जहाँ से पैसे लिए जाते हैं। अधिकारी बंद लिफाफों में पैसे लेते हैं, और जब तक पैसा न दिया जाए, किसानों के काम लटकाए जाते हैं। अगर यही स्थिति रही, तो हम कार्यालय पर तालाबंदी करेंगे।”
दूसरी ओर, चकबंदी सीओ कल्याण सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा, “किसान यूनियन के कुछ लोग बेवजह का दबाव बनाकर कार्य में जल्दबाजी चाहते हैं। कई बार धीरज लाटियान फोन पर धमकी देते हैं और नाजायज तरीके से सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं।”
सीओ ने स्पष्ट किया कि चकबंदी प्रक्रिया एक कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें निर्धारित समय लगता है। किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी के आरोप की जांच कराने को वह तैयार हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन की नजर इस विवाद पर टिक गई है। किसान संगठनों द्वारा आंदोलन की चेतावनी को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि इस टकराव का अंजाम क्या होता है – जांच या आंदोलन?











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