मुजफ्फरनगर। छपार टोल प्लाजा पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के उत्तराखंड प्रदेश कोषाध्यक्ष सुक्रमपाल सिंह के वाहन को बिना टोल शुल्क के गुजरने दिया गया, लेकिन टोल कर्मियों ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि शनिवार से किसी भी संगठन को टोल में छूट नहीं दी जाएगी। इस चेतावनी से नाराज भाकियू कार्यकर्ताओं ने टोल पर ही धरना शुरू कर दिया।
धरने का नेतृत्व भाकियू के पुरकाजी ब्लॉक अध्यक्ष मोनू प्रधान ने किया। कुछ ही देर में भाकियू के दर्जनों कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और टोल प्लाजा पर बैठकर विरोध जताने लगे। टोल कर्मियों की दलील थी कि अब यह टोल प्लाजा एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधीन आ चुका है, और अब इसका संचालन किसी निजी कंपनी के पास नहीं है। ऐसे में किसी भी संगठन या व्यक्ति को टोल छूट नहीं दी जाएगी।
धरने में उठाई गईं ये प्रमुख मांगे:
1.भाकियू कार्यकर्ताओं, स्थानीय किसानों और कर्मचारियों के वाहनों को पूर्ववत टोल छूट दी जाए।
2.टोल पर कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों को पहले की तरह ही कार्य पर रखा जाए।
3.हाईवे किनारे की नालियों की सफाई कराई जाए।
4.कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए सड़कों के गड्ढे तुरंत भरे जाएं।
धरना कई घंटे तक चला, जिससे टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। अंततः टोल प्रबंधन की ओर से उप प्रबंधक संदीप दीक्षित मौके पर पहुंचे और भाकियू की सभी मांगों को स्वीकार करने की घोषणा की। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा और धरना समाप्त कर दिया।
जिला मीडिया प्रभारी शक्ति सिंह, संकित मलिक, मुसर्रफ त्यागी, शहजाद त्यागी, शशि गुर्जर, दीपक मुखिया, तोसीन त्यागी, मोमीन, अमजद, नीटू, बबलू समेत अनेक भाकियू कार्यकर्ता मौजूद रहे।










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