मुजफ्फरनगर। तापमान का ग्राफ गिरने से दिल के मरीजों के लिए भी दिक्कत पैदा हो रही है। जिला अस्पताल में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। चिकित्सकोंं के अनुसार ठंड के मौसम में शरीर की धमनियां सिकुड़ जाती हैं। खून का प्रवाह धीमा होने के कारण दिल के मरीजों को परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है। बढ़ता वायु प्रदूषण भी दिल और अस्थमा रोगियों के लिए घातक है। एक्यूआई 364 पर पहुंच गया है।
नवंबर में रात का तापमान घटने के कारण ह्रदय रोग विभाग में उपचार के लिए आने वाले दिल के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। परामर्श के लिए आने वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन औसतन 150 तक पहुंच रही है।
नसों में खून जमने से बढ़ता है हृदयघात का खतरा : जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. प्रशांत कुमार का कहना है कि ठंड के दिनों में रक्तचाप बढ़ता है। पहले से बीमार दिल के मरीजों की नसों में ठंड के कारण कड़ापन होने लगता है। सामान्य अवस्था में जब रक्तचाप बढ़ता है तो नसों में खून का बहाव तेज होता है। लेकिन ठंड में रक्तचाप बढ़ने से नसों में खून जमने लगता है, जिससे नसों के फटने का खतरा पैदा हो जाता है। जिन्हें पहले से हृदय रोग हैं तो उनकी दवा की मात्रा भी बढ़ जाती है।
ऐसे में मधुमेह के रोगी विशेष तौर से सावधानी बरतें। लापरवाही से उन्हें हृदयघात की संभावना बढ़ जाती है।










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