नई दिल्ली : ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की खोज में एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है. बायोटेक्नोलॉजी कंपनी एनिक्सा बायोसाइंस ने बताया कि उसका स्तन कैंसर का टीका पहले क्लिनिकल परीक्षण के बेहद सफल रहा है. अब बहुत जल्दी इसके दूसरे चरण का ट्रायल शुरू किया जाएगा. यह ऐसा टीका है कैंसरग्रस्त ट्यूमर को ग्रोथ करने से पहले रोक देता है. इसका मतलब यह हुआ कि इस वैक्सीन को लगाने के बाद ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को भी बीमारी से बचाया जा सकता है. वहीं जिन लोगों को यह बीमारी नहीं है और जिन लोगों को इसका खतरा ज्यादा है, अगर वे इस वैक्सीन को लगा लें तो उन्हें स्तन कैंसर नहीं होगा.
एनिक्सा बायोसाइंस के सीईओ अमित कुमार ने वॉग इंडिया को बताया कि यह टीका मरीज की इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है. यह वैक्सीन स्तन कैंसर की कोशिकाओं को खोजकर, उसे पहचान कर उसे नष्ट करती है. उन्होंने कहा कि अगर किसी मरीज को टीका लगाया गया और उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित हो गई, तो कैंसर दिखते ही यह प्रणाली उन कोशिकाओं को बढ़ने से पहले खत्म कर देगी. यह टीका हर दो हफ्ते के अंतराल पर तीन डोज़ में दिया जाता है.
इस वैक्सीन का लक्ष्य लक्ष्य अल्फा लैक्टअल्ब्यूमिन मिल्क प्रोटीन को खत्म करना है. अल्फा लैक्टअल्ब्यूमिन प्रोटीन सामान्यतः केवल स्तनपान के दौरान बनता है लेकिन लगभग 70 प्रतिशत ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर (TNBC) मामलों में भी यह प्रोटीन पाया जाता है. चूहों पर किए गए अध्ययन में अच्छे परिणाम मिले हैं. पर अगले चरण के मानव परीक्षणों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता को बड़े पैमाने पर प्रमाणित करना होगा.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राधेश्याम नायक ने बताया कि यह टीका एक प्रकार की इम्यूनोथेरेपी है जिसका उद्देश्य कुछ आक्रामक स्तन कैंसर के प्रकारों, खासकर ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर की रोकथाम करना है. पारंपरिक टीकों की तरह यह संक्रामक एजेंटों को लक्षित नहीं करता बल्कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करता है ताकि वह विशिष्ट ट्यूमर से जुड़े प्रोटीन वाले कोशिकाओं को पहचानकर उसे नष्ट करे.
अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में हेमेटोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और बीएमटी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रशांत मेहता ने बताया कि शोधकर्ताओं ने 35 महिलाओं पर एक प्रारंभिक चरण के क्लिनिकल परीक्षण में अध्ययन किया ताकि कैंसर की रोकथाम के लिए एक संभावित तरीका खोजा जा सके. कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली से बच निकलने की क्षमता है जिसे इम्यून इवेज़न कहते हैं.
यह प्रयोगात्मक टीका प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर बनने से पहले उसे पहचानने और प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित करता है. यह उन विशेष एंटीजेंस को लक्षित करता है जो कोशिकाएं कैंसर बनने पर व्यक्त करती हैं. इन्हें रिटायर्ड एंटीजेंस भी कहा जाता है. यह सामान्यतः देरी से हो रही प्रेग्नेंसी के दौरान एक्टिव होता है. अभी यह शोध प्रीक्लिनिकल चरण में है और यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह तरीका मनुष्यों में काम करेगा या नहीं लेकिन परिणाम उत्साहजनक हैं. पीएसआरआई अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय बताते हैं कि यह टीका अभी प्रारंभिक क्लिनिकल परीक्षणों में है.पर इसे मजबूत वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया जा रहा है. यह उम्मीद जगाता है. इसे भरोसेमंद माना जा रहा है क्योंकि यह कठोर क्लिनिकल परीक्षणों से गुजर रहा है और क्लिवलैंड क्लिनिक जैसे सम्मानित संस्थान इसका परीक्षण कर रहा है.











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