मुजफ्फरनगर। रिश्तों की पवित्रता को तार-तार करने वाली एक हृदय विदारक घटना ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। यह कहानी है एक नवजात की जो सांस लेने से पहले ही समाज के डर और रिश्तों की गिरावट का शिकार हो गया। रुड़की रोड पर कूड़े के ढेर में मिला वह भ्रूण दरअसल एक ऐसा सच है, जिसे जानकर हर संवेदनशील इंसान का सिर शर्म से झुक जाए।
पुलिस जांच से सामने आया कि नवजात का जन्म जीजा और साली के अवैध रिश्ते से हुआ था। जब साली गर्भवती हुई तो समाज के डर ने उन्हें इतना अंधा कर दिया कि जन्म से पहले ही भ्रूण की हत्या कर दी गई। गर्भपात के बाद उसे कूड़ेदान में फेंक दिया गया, मानो वह कोई मनुष्य न होकर कोई वस्तु हो।
24 जून को जब कूड़े के ढेर में एक नवजात भ्रूण मिला, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि इसकी कहानी इतनी भयावह होगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। कोतवाली नगर प्रभारी उमेश रोरिया की अगुवाई में बनी टीम ने शहरभर के 122 से अधिक सीसीटीवी कैमरे खंगाले। धीरे-धीरे लिंक जुड़ते गए और पुलिस रामपुरी तक पहुंच गई।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रिया नाम की युवती अपनी बड़ी बहन की देखरेख के लिए उसके ससुराल आई थी। इसी दौरान उसका अपनी बहन के पति अभिषेक से शारीरिक संबंध बन गया। चार महीने बाद जब प्रिया को पता चला कि वह गर्भवती है, तब दोनों ने मिलकर यह खौफनाक फैसला लिया। गर्भपात की प्रतिबंधित दवाएं दी गईं और नवजात को मारकर कूड़े में फेंक दिया गया।
गौसेवक नीशू की तरफ से दर्ज कराई गई शिकायत पर अभिषेक और प्रिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने इस मामले में पूरी गंभीरता दिखाई और समाज के सामने एक बड़ी सच्चाई को उजागर किया। कोतवाली नगर की टीम में प्रभारी निरीक्षक उमेश रोरिया, उपनिरीक्षक मोहित कुमार, हेड कांस्टेबल गौरव चौधरी, कांस्टेबल रोहित व ज्योति शामिल रहे। इस साहसिक कार्रवाई पर एसएसपी ने टीम को 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया।
यह सिर्फ़ पुलिस केस नहीं है, यह समाज में नैतिक पतन की कहानी भी है। क्यों आज भी अवैध संबंधों की सज़ा एक बेगुनाह को मिलती है? क्यों समाज का डर इतना गहरा है कि लोग इंसानियत तक भूल जाते हैं? और क्या हम तब भी चुप रहेंगे?










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