लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शिक्षा और शिक्षकों का मुद्दा गरमाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने स्कूलों को बंद करने और शिक्षकों की कमी के गंभीर आरोप लगाए, जिस पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष रखा।
स्कूल बंद नहीं, मर्ज किए गए हैं: संदीप सिंह-
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने प्रदेश में कोई भी बेसिक विद्यालय बंद नहीं किया है। उन्होंने सदन को बताया, “जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या 50 से कम थी, उन्हें एक किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य स्कूलों में ‘मर्ज’ (विलय) किया गया है। सदन को विद्यालय बंद होने की गलत जानकारी न दी जाए।”
भर्तियों और तबादलों पर विपक्ष को घेरा-
शिक्षक भर्ती के सवाल पर मंत्री ने बताया कि 2018 से 2023 के बीच सरकार ने 1,26,371 शिक्षकों की पारदर्शी तरीके से भर्ती की है और छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने तबादला नीति पर कहा कि 2017 से पहले शिक्षकों के स्थानांतरण में ‘धन उगाही’ होती थी, जबकि आज पूरी व्यवस्था ऑनलाइन और पारदर्शी है।
सपा ने लगाया गरीब विरोधी होने का आरोप-
इससे पहले समाजवादी पार्टी के विधायक ब्रजेश कठेरिया, डॉ. रागिनी और इंजीनियर सचिन यादव ने सरकार को घेरा। सपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि:
पिछले छह वर्षों से बेसिक स्कूलों में एक भी नई भर्ती नहीं की गई है।
शिक्षकों को शिक्षण कार्य के बजाय अन्य ड्यूटी में लगा दिया जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सरकार जानबूझकर प्राइमरी स्कूलों को बंद कर रही है, जो गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
शिक्षक हितों की रक्षा का दावा-
मंत्री संदीप सिंह ने आश्वासन दिया कि बेसिक शिक्षा विभाग में एक भी स्वीकृत पद समाप्त नहीं किया गया है। सरकार शिक्षकों के स्वास्थ्य और उनके कार्यस्थल की सुविधाओं को लेकर संवेदनशील है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कटिबद्ध है।










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