मुज़फ्फरनगर। रुड़की रोड स्थित एक दुकान को लेकर शहर में राजनीतिक बवाल मच गया है। व्यापारी श्रीपाल जैन ने भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य जगदीश पांचाल व उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने उनकी दुकान पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की है। श्रीपाल का कहना है कि न सिर्फ दुकान की दीवारें तोड़ी गई हैं, बल्कि अब दुकान को पूरी तरह कब्जाने की साजिश रची जा रही है। मामला गर्माने पर एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं।
व्यापारी श्रीपाल जैन ने शनिवार को नगर कोतवाली पहुंचकर एसएसपी संजय वर्मा को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि उन्होंने भाजपा नेता जगदीश पांचाल से कुछ समय पूर्व दुकान खरीदी थी। पहले पांचाल ने दुकान के पीछे की दीवार तुड़वाई और अब आगे की दीवार को भी बीती रात गिरा दिया गया। व्यापारी का आरोप है कि अब दुकान पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
श्रीपाल ने यह भी दावा किया कि उनकी खरीदी गई दुकान के चारों ओर निर्माण उन्होंने स्वयं कराया था, लेकिन अब भाजपा नेता उन्हें दुकान से बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय व्यापारियों में भी रोष है और वे इस मामले को लेकर चिंतित हैं।
थाना दिवस के मौके पर नगर कोतवाली पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने मामले का संज्ञान लेते हुए थाना प्रभारी और लेखपाल को तत्काल मौके पर जाकर स्थिति की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। एसएसपी ने साफ कहा कि जो भी पक्ष दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच राजस्व विभाग की टीम को भी मौके पर भेजे जाने की संभावना है, ताकि विवादित भूमि के सीमांकन व स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट की जा सके।
दूसरी ओर, भाजपा नेता जगदीश पांचाल ने व्यापारी के आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत करार दिया। उन्होंने कहा कि “हमने ही श्रीपाल जैन को दुकान बेची थी। उस समय उसने चारों ओर निर्माण कराया था और आगे तीन फीट तक छज्जा भी डाला गया था, जिसकी मौखिक सहमति हमने दे दी थी।”
पांचाल का यह भी दावा है कि अब श्रीपाल जैन दुकान के आगे दीवार खड़ी कर रहे हैं जिससे रास्ता बंद हो रहा है। उन्होंने श्रीपाल की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह जानबूझकर विवाद खड़ा कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस व प्रशासन की टीमें मामले की जांच में जुट गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय व्यापारियों में हलचल मचा दी है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जांच के बाद किस पक्ष को सही ठहराता है और कानून के तहत क्या कार्रवाई की जाती है।










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