लखनऊ : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हिंदी भाषा विरोधी बयान के बाद उत्तर प्रदेश में सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय लोकदल ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लखनऊ विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक पार्टी विधायक दल के नेता राजपाल बालियान के नेतृत्व में रालोद विधायकों ने हिंदी भाषा के सम्मान और नई शिक्षा नीति के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हाल ही में हिंदी पर निशाना साधते हुए कहा था, “हम हिंदी थोपे जाने का विरोध करेंगे। हिंदी सिर्फ एक मुखौटा है, असली चेहरा संस्कृत है।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए हिंदी और संस्कृत थोपने की कोशिश कर रही है। स्टालिन ने यह भी दावा किया कि हिंदी के प्रभुत्व के कारण मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी और अवधी समेत उत्तर भारत की कई भाषाएं नष्ट हो गईं।
रालोद नेताओं ने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन की मुख्य सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) हिंदी का विरोध कर रही है, लेकिन अखिलेश यादव और राहुल गांधी इस मुद्दे पर चुप हैं। प्रदर्शन के दौरान रालोद विधायकों ने सवाल उठाया कि क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी हिंदी विरोधी ताकतों के साथ खड़े हैं?










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