लखनऊ। यूपी में भारतीय जनता पार्टी के कई विधायक इन दिनों बेचैन हैं। उन्हें नींद में हैंडपंप दिखाई दे रहा है। हैंडपंप जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का चुनाव चिन्ह है। विधायकों को डर है कि कहीं गठबंधन में उनकी सीट न चली जाए। दरअसल, पश्चिमी यूपी सहित ब्रज क्षेत्र की कई सीटों पर आरएलडी ने अभी से निगाहें जमा दी हैं। इनमें मथुरा, आगरा, हाथरस, अलीगढ़ सहित कई जिलों की कुछ सीटें शामिल हैं। खबर है कि कुछ भाजपा नेता बागी तेवर दिखा रहे हैं तो कइयों को हैंडपंप का पानी पीने में भी परहेज नहीं है।
योगी कैबिनेट के मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने हाल ही में रालोद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। यह बयान जरूर लक्ष्मीनारायण का था, मगर इसे भावनात्मक समर्थन कई ऐसे विधायकों का था, जिन्हें अपनी सीट जाने का डर सता रहा है। हालांकि मंत्री के इस बयान ने गठबंधन के मोर्चे पर पार्टी को थोड़ा असहज जरूर कर दिया। उधर, रालोद खेमे से भी इसे लेकर प्रतिक्रिया हुई। ऐसे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने एक सवाल के जवाब में इसे मंत्री की निजी राय करार दिया था। मगर इस पूरे एपिसोड ने इस मुद्दे को हवा जरूर दे दी है।
पश्चिमी यूपी के कई जिलों की सीटों पर रालोद की नजर
दरअसल शामली, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों की सीटों पर रालोद की नजर है। यह वो सीटें हैं जहां रालोद ने पहले या तो जीत हासिल की थी या फिर दूसरे स्थान पर रहा था। हाथरस की सादाबाद सीट भी रालोद ने जीती थी। अब भाजपा के कई जनप्रतिनिधि पार्टी आलाकमान को यह समझाने में भी जुटे हैं कि रालोद के साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव में कोई खास लाभ नहीं हुआ।











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