मुज़फ्फरनगर। सिविल बार एसोसिएशन मुजफ्फरनगर के अधिवक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर सोमवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने ज़िलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि जल्द इस पर निर्णय नहीं लिया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
संगठन के अध्यक्ष सुनील कुमार मित्तल ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि पश्चिम यूपी की 7.5 करोड़ की आबादी आज भी न्यायिक उपेक्षा का शिकार है। यहां से इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी लगभग 700 किलोमीटर है, जिससे आम नागरिकों को न्याय के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह केवल जनसंख्या का सवाल नहीं, बल्कि न्यायिक सुविधा और संवैधानिक अधिकार का प्रश्न है।
अध्यक्ष मित्तल ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में कोल्हापुर में मात्र 1.64 लाख की आबादी के लिए हाई कोर्ट बेंच की स्वीकृति दे दी गई, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बार-बार की मांगों को अनसुना किया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक उपेक्षा करार दिया और कहा कि एक लंबे अरसे से बार संगठन लगातार पत्राचार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब धैर्य जवाब दे रहा है।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि आगामी समय में सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई, तो समूचे पश्चिमी यूपी के वकील एकजुट होकर निर्णायक आंदोलन करेंगे। उन्होंने इसे जनहित बनाम शासन की उदासीनता की लड़ाई बताया।
ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री से अपील की कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच को पश्चिम उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से स्वीकृति दी जाए, ताकि करोड़ों लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय मिल सके। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की भागीदारी रही, जो नारेबाजी करते हुए बेंच की स्थापना की मांग कर रहे थे।
सिविल बार एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यह मुद्दा केवल वकीलों का नहीं, बल्कि जनता की आवाज बन चुका है, जिसे अब और अनसुना नहीं किया जा सकता।










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