मुज़फ्फरनगर। सोमवार को जिले भर के परिषदीय शिक्षक एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के विरोध में जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रदर्शन किया और आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत शिक्षक प्रकोष्ठ के पश्चिम उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को एक आदेश पारित किया है, जिसके अनुसार सभी शिक्षकों के लिए नौकरी पर बने रहने और पदोन्नति के लिए TET (टीईटी) परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस फैसले से शिक्षकों में भारी असंतोष है। रविंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में समय-समय पर योग्यता के नियम बदलते रहे हैं। 1900 के दशक में जहां इंटरमीडिएट योग्यता थी, वहीं बाद में इसे ग्रेजुएशन कर दिया गया और वर्ष 2010 में TET परीक्षा की शुरुआत हुई, जिसे 2011 से अनिवार्य कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि अधिकांश शिक्षक TET पास करने में सक्षम हैं, लेकिन चिंता उन शिक्षकों को लेकर है, जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक हो चुकी है। नियमों के अनुसार, TET परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित है। ऐसे में यह आदेश कई शिक्षकों के भविष्य को संकट में डाल सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की है कि पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस आदेश से छूट दी जाए और उम्र सीमा को देखते हुए उन्हें TET से मुक्त किया जाए।
शिक्षकों ने सरकार से अपील की है कि वे शिक्षा प्रणाली में स्थायित्व और सम्मान बनाए रखते हुए ऐसे आदेशों की पुन: समीक्षा करें ताकि हजारों शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित रह सके।










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