नई दिल्ली। देश में साइबर अपराध के जरिए ठगी होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सरकारी एवं निजी संस्थानों को टारगेट करने के अलावा आम व खास लोगों को भी साइबर अपराधी निशाना बना रहे हैं। बिना मांगे लोन देना व उसके बाद खाता खाली कर देना, आईटीआर भरने के नाम पर रिफंड उड़ा लेना और लोन देने की बात कह कर खाता खाली कर देना, ऐसे नए नए मामले सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी की वारदात भी हो रही हैं। परिचित के नाम पर जानकारी लेकर आर्थिक नुकसान पहुँचाने की वारदात भी देखने को मिल रही हैं। ताजा मामला सीआरपीएफ के सिपाही/जीडी अनिल सोरेन, जो वर्तमान में जी/95 बटालियन मच्छोदरी पार्क वाराणसी कैंप में तैनात है, के साथ हुआ है। एसबीआई योनो एप के नाम पर सिपाही के साथ ठगी हुई है। उसके खाते से 5,72,500 रुपये निकल गए।
जानकारी के मुताबिक, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात सिपाही अनिल सोरेन के मोबाइल नंबर पर 16 अगस्त को एक कॉल आई थी। फोन करने वाले पूछा कि आपका एसबीआई योनो एप में कोई समस्या तो नहीं है। सिपाही ने बताया कि यूजर नेम तथा पासवर्ड लॉग इन नही हो रहा है। फोन करने वाले ने कहा कि आपका योनो एप काफी पुराने वर्जन का है। हम आपके व्हाट्सप्प पर नया वर्जन वाला एप्लीकेशन भेज रहे हैं। इसमें आप यूजरनेम या पासवर्ड डालिए। इसके बाद आपका एप खुल जाएगा। सिपाही ने एप पर यूजर नेम पासवर्ड लॉग इन कर दिया। इसके बाद योनो एप पर 4 घंटे का समय शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि यह टाइम खत्म होने के बाद आपका एप चालू हो जाएगा। इतनी बात कह कर सामने वाले ने फोन काट दिया। 17 अगस्त की शाम को योनो का लोगो लगे एक मोबाइल नंबर से सिपाही के व्हाट्सप्प पर एक कॉल आती है।
सिपाही ने फोन रिसीव किया तो उन्होंने कहा कि आपका योनो एप चालू हो गया है। बात करते हुए उसके खाते से 1,99,000/-रुपये के कटने का मैसेज आया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता। दोबारा फिर 2,50,000 रुपये कटने का मैसेज आया। उसके बाद 50,000 और फिर 48500 रुपये के कटने का मैसेज आया। उसका मोबाइल हैंग हो गया। सिम निकाला तब जाकर मोबाइल बंद हुआ। तब तक मोबाइल पर 5 लाख 72 हजार 500 रुपए के कटने का मैसेज प्राप्त हुआ। पीड़ित सिपाही ने बैंक में जाकर स्टेटमेंट निकाली तो मालूम पड़ा कि उसके खाते से 572500 रुपये निकल चुके थे।
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में एक जवान की आईटीआर फाइलिंग के दौरान रिफंड की राशि पर हाथ साफ कर दिया गया। अनजान व्यक्ति के बैंक खाते में बतौर रिफंड की राशि, 77040 रुपये चले गए। सशस्त्र सीमा बल ने अपने सभी जवानों को सचेत किया है कि वे अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर अधिकतम आईटीआर रिफंड के प्रलोभन में फंस कर अपना इन्कम टैक्स पोर्टल, पैन कार्ड और ओटीपी, आदि जानकारी साझा न करें। 44वीं वाहिनी में तैनात आरक्षी (एमटीएस) राजीव ओरावं, एटी 2025 के दौरान नरकटियागंज से स्थानांतरित होकर 69वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, पाक्योंग (सिक्किम) में आया है। 44वीं वाहिनी में ड्यूटी के दौरान एक अन्य कार्मिक, आरक्षी एमटीएस चंद्र भूषण से आईटीआर फाइलिंग के लिए किसी अनजान व्यक्ति का नंबर मिला।
राजीव ने उस अनजान व्यक्ति से फोन पर बातचीत की। उससे अपना आईटीआर फाइल करवाया। जब रिफंड की राशि प्राप्त नहीं हुई तो उसने इनकम टैक्स पोर्टल पर चेक किया। उक्त कर्मी के इनकम टैक्स पोर्टल पर किसी दूसरे व्यक्ति का मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस और बैंक खाता अपडेट कर दिया गया था। नतीजा, अनजान व्यक्ति के बैंक खाते में रिफंड की राशि 77040 रुपये चले गए।
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ में एक ऐसा ही मामला देखने को मिला था। 181 बटालियन के हवलदार जीडी श्रीबास पाल के साथ ऑनलाइन ठगी हो गई। कुछ ही मिनट में हवलदार पाल का 240000 रुपये का लोन स्वीकृत हो गया। खास बात है कि उसने ऐसा कोई आवेदन ही नहीं किया था। पैसे खाते में आ गए, लेकिन तभी चार बार में 385512 रुपये निकल गए।
एक अन्य मामले में ठग द्वारा जवान के मोबाइल पर फोन किया गया। उनकी बातचीत के ऑडियो के मुताबिक, अफसर बनकर वह ठग, जवान से कहता है, आप अपना व्हाट्सएप खोलिये। क्या आपने व्हाट्सएप ओपन कर लिया है। जवान पूछता है, उसका क्या करना है सर। तुम लाइन पर रहो। गूगल पे, यूज करते हो। नहीं सर, पेटीएम है मेरे पास। देखो तुम्हें कुछ भेजा है। हां सर आया है। इसमें जयप्रकाश पासवान लिखा है। वह 25 हजार रुपये की पेमेंट किए है। ठग कहता है कि तुम अपना पेटीएम ऑन करो। जवान, मुश्किल से यह पूछने का साहस जुटाता है कि आपका नाम क्या है। आप कौन बोल रहे हैं। वो छोड़िये, आप इस नंबर पर पैसे भेज दें। जवान ने फिर पूछा, साहब, आप कौन बोल रहे हैं।
आप सुभाष साहब तो नहीं हैं। ठग बोला, मैडम ने डाली है पेमेंट। मैं सुधीर साहब हूं। जवान कहता है, सर आप पहले तो बोले थे, हम सुभाष मीणा साहब हैं। अब कह रहे हैं सुधीर साहब हैं। इसके बाद जवान को कुछ शक होने लगता है। वह कहता है कि मैं कंपनी में फोन लगाकर मैडम से पूछ लेता हूं। मीणा साहब से पूछ लेता हूं। अरे तुम वो छोड़ो। कोई अस्पताल में भर्ती है, इमरजेंसी है। तुम नंबर लगाओ व पेटीएम करो। फोन बाद में कर लेना। सर, आप ऐसा बोल रहे हैं। अच्छा तुम देखो कि पेटीएम पर क्या नंबर आ रहा है। जवान कहता है, नहीं साहब, मैं मैडम से बात कर लेता हूं। उसके बाद ही कुछ कर सकूंगा। इस तरह से वह जवान, ठगी का शिकार होने से बच गया।
सशस्त्र सीमा बल ‘एसएसबी’ की ‘सी’ कंपनी, 32वीं वाहिनी में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था। एसएसबी निरीक्षक, उपेंद्र कुमार मिश्र को 15 लाख नब्बे हजार रुपये की चपत लग गई। उसने ‘एक्सक्लूसिव एप’ में ट्रेडिंग के लिए उक्त राशि लगाई थी। उसे बताया गया कि उसकी राशि 55 लाख रुपये हो गई है। कुछ दिन बाद जब उसने 30 लाख रुपये निकालने चाहे तो वह नहीं निकल सके। बाद में उसने साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करा दी।
सीआरपीएफ की 48वीं बटालियन के एसआई (जीडी) रतन चंद के खाते से ऑनलाइन ठगों ने 297615 रुपये निकाल लिए थे। ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाकर पहले उनसे इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से पांच रुपये के सर्विस चार्ज का भुगतान कराया। इसके बाद उनके खाते से 297615 रुपये निकल गए।
साइबर अपराधियों ने सीमा सुरक्षा बल ‘बीएसएफ’ की 100 वीं बटालियन के दो जवानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा दिया था। सिपाही जीडी सुबोध राम और हवलदार एनए महेश कुमार सिंह के व्हाट्सएप पर ‘आयुष्मान भारत’ शीर्षक नाम से एक लिंक आया था। दोनों जवानों ने जब उस लिंक को दबाया तो एक फाइल डाउनलोड हो गई। कुछ ही देर में पता चला कि उनके क्रेडिट कार्ड से किसी ने तीन मोबाइल फोन खरीद लिए हैं।











Discussion about this post