बागपत। स्वच्छ भारत मिशन शुरू होने के बाद आई अक्षय कुमार की फिल्म टायलेट एक प्रेम कथा से प्रेरित होकर लोगों ने खुले में शौच की बुराई खत्म करने को घरों में शौचालय बनवाए। लेकिन अब कुछ लोग स्वच्छता को लेकर बेपरवाह हो गए हैं। सर्वे रिपोर्ट कुछ ऐसा ही बयां कर रही है, क्योंकि 14 हजार शौचालयों के कहीं टैंकों पर ढक्कन नहीं मिले तो कहीं दरवाजे टूटने समेत दूसरी खामियां मिली।
स्वच्छ भारत मिशन से ग्राम पंचायतों को ओडीएफ बनाने के लिए बड़ा जन जागरूकता अभियान चलाया गया कि गरीबों ने 12 हजार रुपये की दर से अनुदान पाकर तथा अन्य लोग स्वयं के खर्च से घरों में शौचालय बनवाकर खुले में शौच की बुराई त्यागने लगे। सरकार ने 62 करोड़ खर्च करके 52 हजार परिवारों के शौचालयों का निर्माण कराया था। वर्ष 2018 में प्रदेश का 7वां ओडीएफ जिला बागपत घोषित हुआ था।
अब स्वच्छ भारत मिशन के तहत बागपत की सभी 244 ग्राम पंचायतों में रेट्रोफिटिंग सर्वे कराया है। कुल 2.28 लाख 847 परिवारों में से अब 1350 परिवारों का सर्वे होना शेष है।
यानी 2.27 लाख 497 परिवारों के शौचालयों की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार 13 हजार 806 परिवारों के शौचालय बदहाल मिले। इनमें छत नहीं होना, फर्श टूटना, सीट टूटना, दरवाजे टूटना व पानी टंकी नहीं होना जैसी खामियां मिली। वहीं 919 परिवारों के शौचालयों के टैंकों पर ढक्कन गायब मिले।
चौंकने वाली बात सर्वे में यह सामने आई कि जिले में 1333 लोग ऐसे मिले, जिनके घरों में शौचालय हैं। लेकिन वह उनका उपयोग नहीं करते। इसलिए इन लोगों को स्वच्छता पर जागरूक कर संवेदनशील बनाने की जरूरत है।











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