शामली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बिजली विभाग (पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड) को बड़ा झटका दिया है, जो जिले में विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की तैयारी कर रहा था। ट्रिब्यूनल ने सख्त आदेश दिया है कि प्रोजेक्ट के नाम पर एक भी पेड़ गैर-कानूनी तरीके से नहीं काटा जाएगा।
क्या है पूरा मामला? झिंझाना के बहाड़ी माजरा से सकौती गांव तक 33 KV की हाई-टेंशन पावर लाइन बिछाई जा रही है। आरोप है कि इस करीब 20 किलोमीटर के रास्ते में हजारों संरक्षित पेड़ (जैसे अर्जुन, नीम, शीशम और पीपल) खड़े हैं। पर्यावरणविद डॉ. अमित कुमार ने एक याचिका दायर कर कहा कि बिजली विभाग ने ‘उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976’ का खुलेआम उल्लंघन करते हुए वन विभाग से बिना किसी अनुमति (NOC) के पेड़ों के बीच खंभे लगा दिए हैं और गैर-कानूनी तरीके से पेड़ों को काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम लेकर झाड़ा था पल्ला: जब इस अवैध कार्य की शिकायत की गई, तो विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता ने लिखित जवाब में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह “मुख्यमंत्री का विशेष प्रोजेक्ट” है और इसकी मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय लखनऊ से हो रही है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए साफ किया कि कोई भी प्रोजेक्ट हो, पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच के माध्यम से स्पष्ट आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक परियोजना के नाम पर कोई भी अवैध पेड़ नहीं काटा जाएगा। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्य सचिव, वन विभाग, एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही, कोर्ट ने स्थानीय ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन और मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि विकास कार्य की आड़ में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन न हो ।
मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को होगी। तब तक बिजली विभाग को अपने हाथ रोकने होंगे। इस आदेश के बाद क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर है, वहीं विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।











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