मुजफ्फरनगर। जनपद में बढ़ते प्रदूषण के स्तर और मौसम के बदलते मिजाज ने आम जनजीवन को सांसत में डाल दिया है। शहर से लेकर देहात तक हवा इस कदर प्रदूषित हो चुकी है कि लोगों के सामने ‘सांसों का संकट’ खड़ा हो गया है। जहरीले स्मॉग के कारण जिला अस्पताल से लेकर निजी क्लीनिकों तक में मरीजों का सैलाब उमड़ रहा है।
अस्पतालों में बढ़ रहा दबाव, OPD फुल-
प्रदूषण का सबसे सीधा और घातक हमला लोगों के श्वसन तंत्र (Respiratory System) पर हो रहा है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में मरीजों का भारी दबाव है। अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले 300 से अधिक मरीजों में से लगभग 80 प्रतिशत केवल सांस लेने में तकलीफ, खांसी और गले में संक्रमण की शिकायत लेकर पहुँच रहे हैं।
खतरनाक स्तर पर पहुँचा AQI: क्यों बिगड़ रहे हालात?
डॉ. त्रिखा के अनुसार, जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति में है। सुबह के समय बढ़ती नमी और कोहरे के कारण धूल के कण और हानिकारक प्रदूषित तत्व वायुमंडल के निचले हिस्से में ही जम जाते हैं। जब लोग इस हवा में सांस लेते हैं, तो ये सूक्ष्म कण फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा कर रहे हैं। सुबह उठते ही लोगों को आंखों में जलन और भारीपन महसूस होना आम बात हो गई है।
चिकित्सकों की सलाह: बरते सावधानी-
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा समय में खुले में व्यायाम करना या टहलना भी जोखिम भरा हो सकता है। डॉक्टरों ने निम्नलिखित परामर्श जारी किए हैं:
घर से बाहर कम निकलें: बहुत जरूरी न हो तो सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें।
मास्क का प्रयोग: बाहर जाते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें।
खान-पान पर ध्यान: गुनगुने पानी का सेवन करें और ताज़ा व गर्म भोजन लें।
बुजुर्ग और बच्चे: बढ़ते प्रदूषण और ठंड का यह घातक मेल बुजुर्गों और बच्चों के लिए सबसे अधिक खतरनाक है, उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग दें और स्वास्थ्य के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।










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