मुजफ्फरनगर। जनपद की जानसठ तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात रहे जय भगवान अग्रवाल ने भ्रष्टाचार और अफसरशाही के खिलाफ एक ऐसी अनूठी जंग लड़ी है, जो आज चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी सिस्टम का हिस्सा रहे अग्रवाल ने अब उसी व्यवस्था की खामियों और माफिया गठजोड़ को उजागर करने के लिए ‘कलम’ को अपना हथियार बनाया है।
17 महीने जेल में काटे, 182 RTI से खुद को किया निर्दोष साबित-
जय भगवान अग्रवाल का आरोप है कि भ्रष्टाचार का विरोध करने पर उनके ही विभाग के अधिकारियों ने उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर 17 महीने और 6 दिनों के लिए जेल भेज दिया। लेकिन जेल की सलाखें उनके हौसलों को नहीं तोड़ पाईं। उन्होंने जेल के भीतर से ही 182 RTI (सूचना का अधिकार) दाखिल कीं। इन आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही वह खुद को निर्दोष साबित करने और जमानत पाने में सफल रहे।
किताब ‘अफसरशाही: एक अनसुना सच’ में बड़े खुलासे-
रिहा होने के बाद उन्होंने अपने संघर्ष और व्यवस्था के काले सच को एक किताब की शक्ल दी है, जिसका शीर्षक है— “अफसरशाही: एक अनसुना सच”। इस पुस्तक में उन्होंने ठोस सबूतों के साथ निम्नलिखित मुद्दों पर प्रहार किया है:
अधिकारी-माफिया गठजोड़: कैसे कुछ अधिकारी माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाते हैं।
किसानों का शोषण: जमीनों और फसलों की लूट के चौंकाने वाले मामले।
फर्जी मुकदमे: ईमानदार कर्मचारियों को चुप कराने के लिए अपनाए जाने वाले हथकंडे।
QR कोड से देख सकेंगे सबूत-
किताब की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दिए गए आरोपों की पुष्टि के लिए QR कोड का उपयोग किया गया है। पाठक इन्हें स्कैन कर संबंधित दस्तावेज, प्रमाण और साक्ष्य स्वयं देख सकते हैं, जिससे इन दावों पर कोई उंगली न उठा सके।
न्याय और सुरक्षा की गुहार-
जय भगवान अग्रवाल का कहना है कि यह किताब केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि उन तमाम किसानों और ईमानदार लोगों की आवाज है जो व्यवस्था के हाथों प्रताड़ित हैं। उन्होंने सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की है।











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