नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और कूटनीतिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त बनाने के लिए पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी है, जो ऊर्जा सुरक्षा, जल प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्रों में मील का पत्थर साबित होंगे।
पीएम मोदी का विजन: “पार्टनरशिप का ऐतिहासिक विस्तार”
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के माध्यम से इस साझेदारी की महत्ता साझा की। उन्होंने कहा, “ये नतीजे भारत-जॉर्डन साझेदारी के एक अहम विस्तार को दर्शाते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) में हमारा सहयोग जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
इन 5 प्रमुख क्षेत्रों में हुआ समझौता:
ऊर्जा और जलवायु: स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहयोग।
जल संसाधन प्रबंधन: पानी के संरक्षण और दक्षता के लिए आधुनिक तकनीकों का आदान-प्रदान।
विरासत का मेल (पेट्रा-एलोरा एग्रीमेंट): जॉर्डन के ‘पेट्रा’ और भारत की ‘एलोरा’ गुफाओं के बीच ‘ट्विनिंग एग्रीमेंट’ हुआ है, जो पर्यटन और एकेडमिक रिसर्च के नए द्वार खोलेगा।
सांस्कृतिक जुड़ाव (2025–2029): सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का नवीनीकरण किया गया है, जो अगले 4 वर्षों तक दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: भारत अपने सफल डिजिटल समाधानों (Digital Stack) को जॉर्डन के साथ साझा करेगा, जिससे वहां के डिजिटल शासन और समावेशी विकास को गति मिलेगी।
डिजिटल शक्ति बनेगा जॉर्डन-
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत अपनी जनसंख्या स्तर पर सफल डिजिटल पहलों के अनुभव जॉर्डन को हस्तांतरित करेगा। इससे जॉर्डन की डिजिटल परिवर्तन प्रक्रिया को बड़ा समर्थन मिलेगा और शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी।











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