फेफड़ों के कैंसर की बात की जाए तो उसके शुरुआती लक्षण इतने सूक्ष्म हो सकते हैं कि उन्हें सर्दी, तनाव या यहां तक कि उम्र बढ़ने जैसी रोज़मर्रा की समस्याओं के रूप में समझा जाता है. जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक वह फैल चुकी होती है. आज हम फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती 5 लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए.
हल्की और लगातार थकान
हल्की और लगातार रहने वाली थकान, जो आराम करने से भी दूर नहीं होती है. यह सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. यह फेफड़ों के कैंसर का शुरुआती चरण हो सकता है. इसमें शरीर पहले से ही सूजन वाले साइटोकिन्स का उत्पादन करके ट्यूमर पर प्रतिक्रिया कर रहा हो सकता है, जो लगातार कम ऊर्जा की भावना पैदा करते हैं. इसके चलते शरीर लगातार थकान मानने लगता है.
कंधे के आसपास लगातार दर्द रहना
आम तौर पर बैठने की खराब मुद्रा या गलत तरीके से सोने की वजह से कंधे के आस-पास लगातार दर्द हो सकता है. फेफड़ों के कैंसर के कुछ मामलों में, दर्द कंधे से शुरू होता है और हाथ तक फैल जाता है. मुश्किल बात यह है कि फेफड़ों में दर्द नहीं होता लेकिन आस-पास की नसों में होता है. अगर इस तरह की स्थिति लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से मिलकर अपने टेस्ट करवाने चाहिए.
बिना किसी कारण फिंगर क्लबिंग
कुछ लोगों की उँगलियाँ स्वाभाविक रूप से गोल या चौड़ी होती हैं, है न? हमेशा नहीं. कई बार उंगलियां फूली हुई दिखाई देती हैं और नाखून मुड़े हुए हो जाते हैं. यह एक मूक संकेत है, जो अक्सर खून में खराब ऑक्सीजनेशन से जुड़ा होता है. यह फेफड़ों के कैंसर का एक शुरुआती संकेत हो सकता है. यह परिवर्तन हफ्तों या महीनों में धीरे-धीरे विकसित होता है और दर्दनाक नहीं होता है, जिससे अक्सर लोग इसे अनदेखा कर देते हैं.
एक तरफ़ पलक का झुकना
आँखों की थकान, माइग्रेन या तंत्रिका तंत्र में दिक्कत की वजह से पलकें एक तरह झुख सकती हैं और साथ ही कई बार पुतली छोटी हो सकती है. इसके अलावा चेहरे के एक तरफ़ पसीना आना कम हो सकता है. ये सब लक्षण हॉर्नर सिंड्रोम कहलाते हैं है. ये संकेत तब हो सकते हैं, जब ट्यूमर ऊपरी फेफड़े के पास की नर्व को प्रभावित करने लगता है. ये संकेत बहुत सूक्ष्म होते हैं और दर्द का कारण नहीं बनते. यही वजह है कि अक्सर इन्हें अनदेखा कर दिया जाता है, जो कि गलत परिपाटी है.
आवाज़ में बदलाव आ जाना
आवाज़ की टोन में बार-बार होने वाला या धीरे-धीरे बिगड़ता बदलाव लंग कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है. जब फेफड़ों में पनप रहा ट्यूमर गले में स्वर उत्पन्न करने वाली नर्व पर दबाव डालता है, तो आवाज़ में बदलाव होने लगता है. साथ ही सांस लेने में भी कठिनाई होने लग जाती है. लगातार होने वाला बदलाव है जो हफ़्तों तक बना रहता है. इसे सामान्य गले की खराश मानकर कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए.











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