नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के मामले में लंबे समय से जेल में बंद जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली की एक अदालत ने मानवीय आधार पर बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उमर खालिद की सगी बहन की शादी में शामिल होने के लिए उसे 14 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर कर ली है।
शादी में शामिल होने की मिली अनुमति-
उमर खालिद ने अपनी बहन की शादी का हवाला देते हुए कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई थी। अभियोजन पक्ष के विरोध के बावजूद, कोर्ट ने पारिवारिक समारोह और सामाजिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए उसे 20 दिसंबर से 3 जनवरी तक के लिए रिहा करने का आदेश दिया है।
क्या हैं जमानत की शर्तें?
अदालत ने राहत देते हुए कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं:
उमर खालिद को 3 जनवरी को वापस सरेंडर कर ना होगा।
वह अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान गवाहों से संपर्क नहीं करेगा।
उसे अपनी लोकेशन अपडेट रखनी होगी।
मामले की पृष्ठभूमि-
बता दें कि उमर खालिद साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश’ (UAPA Case) के आरोप में सितंबर 2020 से तिहाड़ जेल में बंद है। इससे पहले उसकी नियमित जमानत याचिकाएं कई बार निचली अदालतों और हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया-
उमर खालिद को मिली इस राहत के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके समर्थकों ने इसे मानवीय जीत बताया है, वहीं विरोधियों का कहना है कि गंभीर धाराओं के आरोपी को राहत मिलना चिंताजनक है।











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