नई दिल्ली : युगांडा की बान्यंकले जनजाति में एक ऐसी अनोखी और चौंकाने वाली परंपरा रही है, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाए. यहां शादी से पहले दुल्हन की चाची को एक बेहद असामान्य जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी. वह दूल्हे का वर्जिनिटी टेस्ट करती थी. यह परंपरा आधुनिक सोच और मानवाधिकारों के लिहाज से जितनी अजीब लगती है, उस समय इस समाज में उतनी ही सामान्य मानी जाती थी. बान्यंकले समाज की ये रस्में आज लगभग समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन इतिहास में यह एक बेहद हैरान कर देने वाला अध्याय जरूर रही है.
इस जनजाति में दुल्हन की चाची की भूमिका सिर्फ पारंपरिक रस्मों तक सीमित नहीं है. शादी के दिन उसे दो विशेष जिम्मेदारियां दी जाती थीं. पहली, दुल्हन की वर्जिनिटी की जांच और दूसरी, दूल्हे का वर्जिनिटी टेस्ट.
इस परंपरा के अनुसार, दुल्हन की चाची शादी से पहले दूल्हे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर यह सुनिश्चित करती थी कि वह संभोग के योग्य है या नहीं. इसी तरह, वह दुल्हन की कौमार्य जांच भी करती थी. यदि दुल्हन वर्जिन नहीं होती, तो उसे सामाजिक बहिष्कार या कठोर सजा तक का सामना करना पड़ सकता था.
बान्यंकले समाज में लड़कियों को आठ-नौ साल की उम्र से ही विवाह की तैयारी कराई जाती थी. चाची उन्हें सिखाती थी कि एक पत्नी और बहू के रूप में उन्हें कैसे आचरण करना है. उन्हें सख्त हिदायत दी जाती थी कि शादी से पहले किसी से भी शारीरिक संबंध नहीं बनाना है. इस समुदाय में मोटे शरीर को सुंदरता का प्रतीक माना जाता था. इसलिए लड़कियों को बचपन से ही मांस, बाजरे का दलिया और दूध खिलाकर मोटा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती थी ताकि वे विवाह योग्य दिखें.
समय के साथ-साथ शिक्षा, मानवाधिकारों की जागरूकता और कानून के बढ़ते प्रभाव से यह परंपरा अब लगभग खत्म हो चुकी है। हालांकि, यह आज भी लोगों के लिए हैरानी और चर्चा का विषय बनी रहती है.











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