रामपुर। हरदोई जेल में बंद सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को मंगलवार को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को चार शर्तों के साथ जमानत दी है। बताते चलें कि सोमवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिसके क्रम में उन्हें कोर्ट ने जमानत देने का फैसला सुनाया है।
कुछ माह पहले शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के आरोप से घिरे सपा नेता आजम खां व अब्दुल्ला आजम को रामपुर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी। जिस पर यह मामला शासन तक पहुंचा था। जिसके बाद इस मामले में शासन ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक शुक्ल के खिलाफ जांच बैठा दी गई थी। इस मामले की दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए थे।
एसपी ने इस मामले की विवेचना अपराध शाखा के इंस्पेक्टर नवाब सिंह को सौंपी थी। नवाब सिंह इस वक्त रामपुर में शहर कोतवाल हैं। इस मामले में पिता-पुत्र को कोर्ट में आरोपी बनाया जा चुका है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सोमवार को अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित किया था।
मंगलवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अब्दुल्ला आजम की जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम को आदेश दिया है कि 20-20 हजार रुपये के दो जमानती और इतनी ही धनराशि का मुचलका दाखिल करने पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में चार शर्तें भी लगाई हैं।
कोर्ट ने कहा है कि बिना न्यायायल की अनुमति के अब्दुल्ल आजम देश नहीं छोड़ेंगे, प्रत्येक तिथि पर न्यायायल में हाजिर होंगे और गवाहों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे एवं विचारण में पूरा सहयोग करेंगे।
रिकार्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में 9 मई 2020 को लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद व अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 218, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का आरोप है।
दरअसल, यह मामला मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के अंतर्गत आने वाली भूमि का है, जो कि इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी। इमामुद्दीन कुरैशी 1947- 48 में भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे और यह संपत्ति शत्रु संपत्ति के रूप में सन 2006 में भारत सरकार के कस्टोडियन विभाग के अंतर्गत दर्ज कर ली गई थी।
रिकॉर्ड की जांच करने पर यह मामला प्रकाश में आया कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में जालसाजी कर शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के लिए आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में अंकित कर दिया गया था तथा रिकॉर्ड के पन्ने फटे हुए पाए गए थे।











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