झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एमके सिंह के बेटे आकर्ष (13) ने मंगलवार दोपहर बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शाम को जब उसके पिता पहुंचे तो उन्होंने उसका शव बाथरूम में शॉवर हेड से लटका हुआ पाया।
सीपरी बाजार थाना प्रभारी आनंद सिंह का कहना है अभी तक कि छानबीन में आकर्ष के अकेलेपन की वजह सामने आई है। इससे वह उदास रहता था। इस वजह से ही उसके आत्मघाती कदम उठाने की आशंका है।
उसके मोबाइल फोन को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। प्रो. एमके सिंह कृषि विश्वविद्यालय में एग्रोनॉमी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उनकी पत्नी शर्मिष्ठा आंबेडकर नगर में प्राइमरी विद्यालय में शिक्षिका हैं।
उनके दो बेटे हैं। ढाई साल का बेटा मां शर्मिष्ठा के साथ रहता है। डा. सिंह के साथ उनका बड़ा बेटा आकर्ष विश्वविद्यालय परिसर स्थित सरकारी आवास में रहता था। वह कक्षा नौ में पढ़ता था।
बेटे के फंदे से लटका देखने के बाद से पिता डा. एमके सिंह की हालत खराब हो गई। वह बदहवास हो उठे। किसी तरह उनके सहयोगियों ने उनको संभाला। कई घंटे तक वह बात करने की भी स्थिति में भी आए।
पुलिस ने उनके सहयोगियों से उनकी पत्नी का नंबर लेकर घटना की सूचना दी। पुलिस जब आकर्ष का शव लेकर जा रही थी, डा. सिंह बेहोश होकर गिर पड़े। उनका इलाज चल रहा है।
मां-बाप नौकरी करते रहे और बेटा घर में अकेला पड़ गया। आसपास के लोगों ने छानबीन के दौरान पुलिस को बताया कि मंगलवार से आकर्ष का स्कूल खुलने वाला था। इसके चलते सोमवार शाम को वह मां के पास से वापस लौटा था। यहां आने के बाद से वह काफी उदास था।
सामान्य तौर पर आवासीय परिसर के बाहर लोग चहलकदमी करने आते हैं लेकिन, उदासी में आकर्ष सोमवार को घर से बाहर नहीं निकला। असिस्टेंट प्रोफेसर डा. एमके सिंह के पड़ोसियों का कहना था घर में सिर्फ दो लोग रहते थे।
डा. सिंह पढ़ाने चले जाते थे। इस बीच आकर्ष पूरे घर में अकेला रहता था लेकिन, किसी को उसके इस तरह आत्मघाती कदम उठा लेने की उम्मीद नहीं थी।
मंगलवार शाम जैसे ही उसके सुसाइड की बात विवि परिसर में फैली, सभी लोग हतप्रभ रह गए। किसी को आकर्ष के सुसाइड कर लेने पर यकीन नहीं हो रहा था। उनका कहना था आकर्ष बेहद शांत सा रहने वाला बच्चा था।











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