लखनऊ : 04 जुलाई 2025 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ गोपाल खेमका हत्याकांड चर्चा में है. बीते शुक्रवार को पटना के जाने-माने व्यवसायी गोपाल खेमका की गांधी मैदान क्षेत्र में उनके अपार्टमेंट के गेट पर गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड का खुलासा महज 72 घंटों में कर लिया गया है. गोपाल खेमका हत्याकांड जांच में में ADG (पुलिस मुख्यालय) और STF प्रमुख आईपीएस कुंदन कृष्णन ने अहम भूमिका निभाई.
आईपीएस कुंदन कृष्णन के नेतृत्व में STF और पटना पुलिस ने 3 दिनों में मुख्य शूटर उमेश को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही गोपाल खेमका हत्याकांड में इस्तेमाल की गई बाइक, पिस्तौल और अन्य हथियार भी बरामद कर लिए हैं. बेऊर जेल में छापेमारी से साजिश के तार गैंगस्टर अजय वर्मा से जुड़े, जिसने कथित तौर पर 10 लाख रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर हत्या करवाई. बिहार के लोकप्रिय आईपीएस कुंदन कृष्णन की स्ट्रैटेजिक लीडरशिप से मामले का जल्दी पर्दाफाश किया जा सका है.
आईपीएस कुंदन कृष्णन कौन हैं?
कुंदन कृष्णन बिहार के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं. वह 1994 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं. इसका मतलब है कि उन्होंने साल 1993 में यूपीएससी परीक्षा पास की थी. आईपीएस कुंदन कृष्णन बिहार के नालंदा जिले के मूल निवासी हैं. उनका जन्म 08 मार्च 1969 को हुआ था. वह अपनी कठोर पुलिसिंग और अपराधियों के खिलाफ बिना डर के कार्रवाई के लिए प्रसिद्ध हैं. उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की है, जो बाहुबलियों और माफियाओं के खिलाफ कठोर रुख अपनाता है. अपराधी उनके नाम तक से डरते हैं.
छपरा जेल दंगा (2002): सरन के पुलिस अधीक्षक (SP) के तौर पर कुंदन कृष्णन ने छपरा जेल में हुए दंगे को कंट्रोल किया था. लगभग 1,200 कैदियों ने जेल पर कब्जा कर पुलिस पर हमला किया था. कुंदन ने AK-47 लेकर व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था, जिसके परिणामस्वरूप 5 कैदी मारे गए थे और स्थिति नियंत्रण में आई थी. इस घटना के बाद वह सुर्खियों में छा गए थे.
आनंद मोहन केस (2006): पटना सिटी के SP के रूप में कुंदन कृष्णन ने बाहुबली और पूर्व सांसद आनंद मोहन को गिरफ्तार किया था. सहरसा जेल में बंद आनंद मोहन एक बार पटना के एक होटल में रुके थे. कुंदन कृष्णन ने तुरंत कार्रवाई कर उन्हें वापस जेल भेज दिया था.
पटना में कठोर पुलिसिंग: 2005 में राष्ट्रपति शासन के दौरान पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में उन्होंने बाहुबलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी. इससे अपराधियों के बीच उनके नाम का खौफ फैल गया.
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF): केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए कुंदन कृष्णन ने CISF में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के रूप में काम किया. कोलकाता में RG कर मेडिकल कॉलेज के रेप-मर्डर मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कॉलेज की सुरक्षा CISF को सौंपी गई, जिसमें उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी.
कुंदन कृष्णन का रिकॉर्ड इतना शानदार है कि अपराधी और माफिया उनके नाम भर से डर जाते हैं. वे अपराधियों के सामने कभी पीछे नहीं हटते हैं. छपरा जेल दंगे में AK-47 के साथ उनकी सक्रियता और आनंद मोहन जैसे बाहुबली को गिरफ्तार करने की घटनाएं इसकी मिसाल हैं. कुंदन कृष्णन की स्ट्रैटेजिक और तुरंत कार्रवाई ने कई जटिल मामलों को सुलझाया. उनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में स्थापित किया है, जो किसी भी दबाव में नहीं झुकता है.
कुंदन कृष्णन ने 1994 बैच के IPS अधिकारी के रूप में बिहार कैडर में सरकारी नौकरी शुरू की थी. वह पटना समेत कई जिलों के पुलिस कप्तान रह चुके हैं. 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद बाहुबलियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में IPS कुंदन कृष्णन ने अहम भूमिका निभाई थी. वह पुलिस मुख्यालय के ADG भी रह चुके हैं. 2024 के आखिर में कुंदन कृष्णन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से बिहार वापस बुलाकर पुलिस मुख्यालय के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) और विशेष कार्य बल (STF) के प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया गया.










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