लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन सदन के बहार नशीली दवाओं, विशेषकर ‘कोडीन कफ सिरप’ की अवैध बिक्री और युवाओं में बढ़ती नशे की लत को लेकर भारी हंगामा हुआ। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जमकर नारेबाजी की और चर्चा की मांग को लेकर वेल में आ गए।
विपक्ष का आरोप: “नशे की गिरफ्त में है प्रदेश का युवा”-
समाजवादी पार्टी के विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप खुलेआम बिक रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि पुलिस और ड्रग विभाग की मिलीभगत से मेडिकल स्टोर इसे नशे के तौर पर बेच रहे हैं, जिससे युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है।
सदन में नारेबाजी और प्रदर्शन-
सपा विधायक दल के सदस्यों ने “युवाओं को नशा देना बंद करो”, “कोडीन का अवैध धंधा बंद करो” जैसे नारों की तख्तियां लेकर सदन में प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही में कई बार व्यवधान उत्पन्न हुआ। विपक्ष का तर्क था कि सरकार इस मुद्दे पर केवल खानापूर्ति कर रही है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
सरकार का पक्ष: “अवैध कारोबार पर हो रही है सर्जिकल स्ट्राइक”-
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नशे के कारोबारियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। हाल ही में मुजफ्फरनगर और अन्य शहरों में हुई छापेमारी का हवाला देते हुए बताया गया कि:
नशीली दवाओं के जखीरे पकड़े जा रहे हैं।
अवैध भंडारण करने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों को जेल भेजा जा रहा है।
ड्रग माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और रासुका (NSA) जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
ड्रग विभाग पर सवाल-
हंगामे के दौरान विपक्ष ने ड्रग इंस्पेक्टरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सपा विधायकों ने मांग की कि जिन क्षेत्रों में अवैध दवाओं की बिक्री हो रही है, वहां के संबंधित अधिकारियों पर भी जिम्मेदारी तय कर निलंबन की कार्रवाई की जानी चाहिए।










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