मुजफ्फरनगर। नगर पालिका के बाहर वर्षों से सौंदर्यीकरण के नाम पर लग रही चाट मंडी को बंद करने के फैसले के खिलाफ दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवार को चाट, फास्ट फूड और फल आदि बेचने वाले दुकानदार नगर पालिका के बाहर धरने पर बैठ गए। इस धरने को भारतीय किसान यूनियन ने भी समर्थन दिया है और संगठन के जिला अध्यक्ष नवीन राठी ने मौके पर पहुंचकर दुकानदारों के पक्ष में आवाज उठाई।
मुज़फ्फरनगर में टाउन हॉल के बाहर वर्षों से लगने वाले चाट बाजार को नगर पालिका द्वारा हटाए जाने के विरोध में मंगलवार से रेडी-पटरी व्यापारियों ने टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज़ व्यापारियों ने “योगी तेरे राज में कटोरा आ गया हाथ में” और “नगरपालिका प्रशासन गरीबों पर अत्याचार बंद करो” जैसे पोस्टर लेकर नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
नगर पालिका ईओ प्रज्ञा सिंह द्वारा दिए गए निर्देश के बाद चाट बाजार को हटाया गया है। बताया जा रहा है कि चाट बाजार का पिछला ठेका 31 मार्च 2025 को समाप्त हो गया था और इस बार कोई नया ठेका जारी नहीं किया गया है। पालिका प्रशासन का तर्क है कि टाउन हॉल के बाहर सौंदर्यीकरण कार्य होना है और चाट बाजार की वजह से सड़क पर जाम की स्थिति उत्पन्न होती है।
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेडी-पटरी व्यापारियों को सम्मान निधि योजना के तहत लाभ देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका गरीबों की रोजी-रोटी छीन रही है। चाट बाजार वर्षों से चल रहा है और यही हमारी आजीविका का मुख्य जरिया है।
पीड़ित दुकानदारों ने बताया, “31 मार्च को पिछला ठेका खत्म हो गया, लेकिन इस बार कोई टेंडर ही नहीं जारी किया गया। हम बार-बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिल रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल रहा। अब मजबूर होकर धरना दे रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि, “पालिका अधिकारी चाट बाजार को जानसठ पुल के नीचे स्थानांतरित करने की बात कर रहे हैं, लेकिन वहां न तो फैमिली जाएगी और न ही व्यापार चलेगा। शहर में वैसे भी हर चौराहे और सड़क पर जाम लगता है, लेकिन हटाया केवल गरीबों को जा रहा है।” व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें दोबारा चाट बाजार लगाने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में ठेला व्यापारी मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
नगर पालिका के इस फैसले से करीब 100 से अधिक परिवार, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चाट बाजार से अपनी आजीविका चला रहे थे, प्रभावित हुए हैं। दुकानदारों ने मांग की है कि उन्हें यहीं काम करने की अनुमति दी जाए, ताकि उनकी आजीविका बनी रहे। भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने धरने को समर्थन देते हुए कहा कि “नगर पालिका का यह निर्णय गरीब दुकानदारों के पेट पर लात मारने जैसा है। सौंदर्यकरण के नाम पर इनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है। हम दुकानदारों के साथ हैं।










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