गाजियाबाद: गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अब दिल्ली एम्स की लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि गाजियाबाद में ही एम्स का सेटेलाइट सेंटर बनने जा रहा है. वसुंधरा सेक्टर-7 में साहिबाबाद नमो भारत स्टेशन के पास 10 एकड़ जमीन इस सेंटर के लिए आवंटित कर दी गई है. लखनऊ में शुक्रवार को हुई आवास एवं विकास परिषद की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते साल गाजियाबाद में एम्स का सेटेलाइट सेंटर बनाने की घोषणा की थी. इसके बाद एम्स की टीम ने वसुंधरा, मंडोला विहार और सिद्धार्थ विहार में जमीन का निरीक्षण किया. इनमें वसुंधरा को सबसे उपयुक्त पाया गया, क्योंकि यह दिल्ली से सटा हुआ है और यहां से नमो भारत ट्रेन और मेट्रो की कनेक्टिविटी बेहतर है.
गाजियाबाद में एम्स का सेटेलाइट सेंटर बनने से न सिर्फ गाजियाबाद बल्कि हापुड़, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों के मरीजों को भी फायदा मिलेगा. अब उन्हें इलाज के लिए दिल्ली जाने की जरूरत नहीं होगी. दिल्ली स्थित एम्स पर मरीजों का दबाव काफी ज्यादा रहता है, ऐसे में यह नया सेंटर न सिर्फ वहां का भार कम करेगा, बल्कि मरीजों को समय पर बेहतर इलाज भी मिलेगा.
वसुंधरा सेक्टर-7 और 8 में आवास विकास परिषद की करीब 80 एकड़ जमीन वर्षों से खाली पड़ी थी. जिस 10 एकड़ जमीन को एम्स सेटेलाइट सेंटर के लिए आवंटित किया गया है, वह पहले से ही अस्पताल के लिए आरक्षित थी. इस वजह से इसके भू-उपयोग में बदलाव की जरूरत नहीं होगी और निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जा सकेगा.
एम्स अधिकारियों ने वसुंधरा को कनेक्टिविटी के लिहाज से सबसे उपयुक्त जगह माना है. यह जगह दिल्ली और नोएडा से महज पांच मिनट की दूरी पर है. नमो भारत ट्रेन का साहिबाबाद स्टेशन और मेट्रो का वैशाली स्टेशन भी पास ही स्थित है. एलिवेटेड रोड की मदद से यहां चंद मिनटों में आसानी से पहुंचा जा सकता है.
बताया जा रहा है कि वसुंधरा सेक्टर-7 में 10 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव पास होने के बाद जल्द ही इस जमीन को एम्स को हस्तांतरित किया जाएगा. जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तेजी से शुरू की जाएगी. इस फैसले से गाजियाबाद और आसपास के जिलों के लाखों लोगों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलेगा और दिल्ली एम्स पर मरीजों का दबाव भी कम होगा.











Discussion about this post