नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही, जहाँ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्ष ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को ‘ड्रामा नहीं, डिलीवरी’ की नसीहत दी। इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया है।
अखिलेश यादव ने उठाए गंभीर सवाल-
एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल: अखिलेश यादव ने कहा कि ‘वोटर लिस्ट में सुधार’ की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसे ‘ड्रामा’ नहीं समझना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ड्यूटी के दबाव के कारण बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौतें भी ‘ड्रामा’ हैं?
‘वोट काटने का आरोप’: उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि वोट काटने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने नोएडा में बड़ी आईटी कंपनियों को हायर किया है, जिनके पास यूपी में वोटर लिस्ट की डिटेल्स हैं।
लोकतंत्र की चिंता: अखिलेश ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब नागरिकों से वोट देने का अधिकार नहीं छीना जाएगा। उन्होंने बीएलओ पर काम के बोझ और तनाव का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने दी थी ये सलाह-
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि संसद में ‘ड्रामा नहीं, डिलीवरी’ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को बिहार चुनाव की हार से निराशा में नहीं रहना चाहिए और राष्ट्र निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।
सदन में हंगामे के कारण स्थगन-
अखिलेश यादव के इस बयान से पहले, एसआईआर के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी थी।











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