नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई है। टैगोर ने इस प्रक्रिया को ‘अभूतपूर्व संकट’ बताते हुए चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप-
अपने नोटिस में, टैगोर ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया एकतरफा और बिना किसी तैयारी के शुरू की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने इस संबंध में न तो शिक्षकों से कोई चर्चा की, न राज्यों के साथ समन्वय किया और न ही जनता की परेशानियों को समझा। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया एक एकाधिकारवादी और अत्यधिक दबाव वाली कवायद बन चुकी है।
बीएलओ के उत्पीड़न का आरोप-
सांसद ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में काम कर रहे शिक्षकों पर भारी दबाव है। वे अपने शैक्षणिक कार्य और चुनावी कार्य के बीच फंसे हुए हैं। इस दबाव के कारण कई शिक्षकों की मौत हो चुकी है और कुछ ने आत्महत्या तक कर ली है। उन्होंने इसे ‘संस्थागत क्रूरता’ बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इन मौतों की कोई जांच नहीं कराई है।
जनता में भ्रम और अविश्वास-
टैगोर ने कहा कि इस प्रक्रिया से आम जनता भी परेशान है, क्योंकि उन्हें बार-बार सत्यापन और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब मतदाता सूची तैयार करने वाले कर्मचारी ही दबाव में होंगे, तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
कांग्रेस की पांच प्रमुख मांगें-
12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया को तुरंत निलंबित किया जाए।
हर बीएलओ की मौत और आत्महत्या की राष्ट्रीय स्तर पर जांच हो।
प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
बीएलओ के लिए सुरक्षित चुनावी वातावरण सुनिश्चित हो।
चुनाव आयोग को तलब कर इस अव्यवस्थित प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा जाए।











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