मुजफ्फरनगर। जनपद के प्रमुख औद्योगिक संगठनों—इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA), फेडरेशन पेपर मिल एसोसिएशन और लघु उद्योग भारती ने संयुक्त रूप से प्रदूषण के मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मेरठ रोड स्थित फेडरेशन भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उद्यमियों ने कहा कि उद्योगों को बिना तथ्यों के निशाना बनाया जा रहा है, जबकि वे सभी सरकारी मानकों का सख्ती से पालन कर रहे हैं।
AQI के लिए मौसम और भूगोल जिम्मेदार: पंकज अग्रवाल-
पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मुजफ्फरनगर के उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के अत्याधुनिक उपकरण (Online Monitoring Systems) लगे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब फैक्ट्रियां बंद रहती हैं, तब भी एक्यूआई (AQI) में गिरावट नहीं आती। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बिजनौर जैसे जिलों में, जहाँ ‘आरडीएफ’ (RDF) का इस्तेमाल नहीं होता, वहाँ भी एक्यूआई स्तर बढ़ा हुआ है। यह साबित करता है कि प्रदूषण का कारण मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां हैं, न कि उद्योग।
स्वच्छ भारत अभियान में मददगार है आरडीएफ-
उद्यमियों ने बताया कि ‘आरडीएफ’ (Refuse Derived Fuel) का इस्तेमाल पूरी तरह वैज्ञानिक है। यह ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का हिस्सा है क्योंकि इससे कूड़े के निस्तारण में मदद मिलती है और विदेशों से आने वाले कोयले पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
24 घंटे निगरानी में हैं उद्योग: कुश पुरी-
आईआईए के नेशनल सेक्रेटरी कुश पुरी ने कहा कि मुजफ्फरनगर एनसीआर (NCR) का हिस्सा होने के कारण केंद्रीय एजेंसियों और यूपीपीसीबी (UPPCB) की 24 घंटे निगरानी में रहता है। हर घंटे का डेटा सीधा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जाता है। उद्यमी प्रभात कुमार ने भी डेटा साझा करते हुए कहा कि बिना समग्र तथ्यों के केवल उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है।
दिग्गज उद्यमियों की मौजूदगी-
प्रेस वार्ता में पवन कुमार गोयल, अश्विनी खंडेलवाल, अशोक अग्रवाल, विपुल भटनागर, राजेश जैन, अंकित संगल, मनीष भाटिया सहित भारी संख्या में उद्यमी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध हैं और उद्योगों को अनावश्यक रूप से बदनाम न किया जाए।










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