बागपत। विकास भवन के सभागार में किसान दिवस पर बुधवार को आयोजित बैठक में किसानों ने अपनी समस्याओं का समाधान न होने पर हंगामा किया। जहां सबसे पहले डीएम के बैठक में न आने पर रोष जताया गया। साथ ही टोल पर धरना दे रहे किसानों पर दर्ज मुकदमा वापस न होने पर उन्हें उखाड़ फेंकने की चेतावनी दी गई। वहीं साफ कहा गया कि समस्याओं का निस्तारण नहीं होने पर हाईवे जाम किए जाएंगे। लुहारी के भीम सिंह ने बैठक में कहा कि जिले में राशन की दुकानों पर कार्ड धारकों को गेहूं-चावल के साथ दस रुपये की सर्फ की थैली को जबरन 60 रुपये में दिया जा र हा है। जिसपर अन्य किसानों ने भी हंगामा करके जांच की मांग उठाई। एसडीएम अविनाश त्रिपाठी ने जांच कराने का आश्वासन दिया। किसान जितेंद्र शर्मा ने पीबी-95 गन्ना प्रजाति की बुआई करने पर इसको चीनी मिलों में खरीदने की मांग उठाई।
भाकियू के एनसीआर के अध्यक्ष प्रदीप धामा ने बड़ागांव में ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर टोल पर धरना देने पर किसानों पर दर्ज मुकदमा खत्म करने की मांग की। उनके साथ ही उपेंद्र तोमर व शिवदत्त शर्मा ने कहा कि ऐसा नहीं होता है तो टोल उखाड़कर फेंक दिए जाएंगे और आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने दोघट बैंक में गन्ना भुगतान 10 मार्च को आने के बावजूद किसानों के खातों में 17 मार्च को ट्रांसफर करने को लेकर हंगामा किया।
किसानों ने मौजिजाबाद नांगल में सड़क बनवाने, बिराल के लोगों ने राजस्व कर्मियों पर रास्ते तथा तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कराने, सूरजपुर महनवा के देवकांत शर्मा ने गांव की व्यायामशाला में ओपन जिम के उपकरण लगवाने, निराश्रित गोवंशों से छुटकारा दिलाने, गांव से रेलवे स्टेशन तक टूटी सड़क बनवाने की मांग की। निनाना के इंद्रपाल ने नकली कीटनाशक बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। वहीं किसान कई बार पहले समस्या रखने को लेकर आपस में भी भिड़ गए। nप्लाट अधिग्रहण होने के बाद भी नहीं मिला मुआवजा : बड़ौत में शामली की ममतेश, कृष्णा व बागपत की चौबली गांव की ज्योति समेत 16 लोगों ने 13 साल पहले प्लाट खरीदे थे। जिनकी रजिस्ट्री हुई लेकिन उनके प्लाट की जमीन दिल्ली-देहरादून आर्थिक कोरिडोर में जाने पर मुआवजा नहीं मिला। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे को जाम करने की चेतावनी दी। किसान नेता राजेंद्र सिंह समेत अन्य ने कहा कि दिल्ली सीमा पर कुछ साल पहले किसान आंदोलन में दम तोड़ने वाले किसान गल्तान सिंह के मृतकाश्रितों को चार साल बाद भी आर्थिक सहायता नहीं मिली। उनको आर्थिक सहायता दी जाए।











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