मुजफ्फरनगर। जनपद में प्रदूषण के बढ़ते स्तर और बाहरी जनपदों से आ रहे कचरे (RDF) के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। रविवार को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में किसानों ने भोपा रोड पर जमकर हंगामा किया। किसानों ने ल
खनऊ और अन्य दूर-दराज के जिलों से कचरा लेकर आए ट्रकों को बीच सड़क पर रोक दिया और कड़ाके की ठंड के बावजूद कपड़े उतारकर अर्धनग्न प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा विवाद?
किसानों का आरोप है कि मुजफ्फरनगर की पेपर मिलों और अन्य फैक्ट्रियों में जलाने के लिए लखनऊ, दिल्ली और हरियाणा जैसे बाहरी क्षेत्रों से भारी मात्रा में कचरा (Refuse Derived Fuel – RDF) लाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि:
इस कचरे को भट्टियों में जलाने से जहरीला धुआं निकलता है।
इससे पूरे जनपद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘अति गंभीर’ श्रेणी में पहुँच गया है।
स्थानीय निवासियों में सांस की बीमारी, आंखों में जलन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
कड़ाके की ठंड में अनोखा विरोध-
रविवार सुबह जब तापमान काफी नीचे था, तब किसानों ने भोपा रोड पर घेराबंदी की। लखनऊ से आए कचरे के ट्रकों को रोककर किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। विरोध जताने के लिए कई किसानों ने अपने कुर्ते और शर्ट उतार दिए और अर्धनग्न होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि “प्रशासन सोया हुआ है और मुजफ्फरनगर को कचरे का ढेर बनाया जा रहा है।”
प्रशासनिक अधिकारियों की दौड़-
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। भाकियू (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने दो टूक कहा कि जब तक बाहरी कचरे की एंट्री जनपद में पूरी तरह बंद नहीं होती और इन ट्रकों को वापस नहीं भेजा जाता, आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं हुआ, तो वे इन कचरे से भरे ट्रकों को सीधे जिलाधिकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट) ले जाकर खड़ा कर देंगे।
आंदोलन की प्रमुख मांगें-
बाहरी जिलों और राज्यों से आने वाले कचरे पर तत्काल रोक लगे।
प्रदूषण फैलाने वाली मिलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
जनपद के AQI को सुधारने के लिए प्रशासन ठोस योजना सार्वजनिक करे।










Discussion about this post