नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी धाक जमाने के लिए निकल चुके हैं. शुभांशु Axiom Mission 4 के तहत अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन यानी ISS के सफर पर रवाना हो गए. उन्होंने स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. अंतरिक्ष से शुभांशु शुक्ला ने अपने पहला संदेश भी भेजा है. इसमें उन्होंने कहा, ‘नमस्कार, मेरे प्यारे देशवासियों, हम 41 साल बाद अंतरिक्ष में पहुंचे हैं. यह बहुत शानदार सफर है.’ वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी अंतरिक्ष यात्रा के लिए बधाई दी है. उन्होंने कहा कि वह अपने साथ 1.4 अरब भारतीयों की इच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर जा रहे हैं.
अमेरिकी अंतरिक्ष स्टेशन (NASA) के अनुसार, Axiom-4 मिशन का लक्ष्य 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर डॉक करना है. इसका मतलब है कि लॉन्च के लगभग 28 घंटे बाद शुभांशु और उनकी टीम ISS पर कदम रखेंगे.
शुभांशु शुक्ला समेत मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री दो सप्ताह यानी 14 दिनों तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेंगे. इस दौरान वे विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े प्रयोग और मिशन में हिस्सा लेंगे.
इस मिशन की कमान नासा की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री और Axiom Space की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक पैगी व्हिटसन संभाल रही हैं. शुभांशु शुक्ला इस मिशन के पायलट की भूमिका में हैं. वहीं दो अन्य मिशन स्पेशलिस्ट यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के स्लावोश उजनांस्की और हंगरी के तिबोर कापू भी उनके साथ इस मिशन में शामिल हैं.
ISRO के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इस मिशन के दौरान पांच वैज्ञानिक प्रयोग और दो STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) डेमो कराएंगे. इनमें से कई प्रयोग भारत और अमेरिका के साझा प्रयास हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संयुक्त घोषणा के तहत शुरू किया गया था.
Axiom-4 मिशन को लेकर लॉन्चिंग पहले कई बार टल चुकी थी. खराब मौसम, फाल्कन-9 रॉकेट में तकनीकी दिक्कत और ISS के रूसी मॉड्यूल में लीक की वजह से देरी हुई. लेकिन आखिरकार बाद आज शुभ मुहूर्त मिल गया. नासा की कार्यकारी प्रशासक जेनेट पेत्रो ने कहा, ‘नासा और Roscosmos के बीच लंबे समय से चला आ रहा सहयोग एक बार फिर इस मिशन को सफल बनाने में मददगार साबित हुआ है.’
शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले दूसरे, जबकि ISS पर कदम रखने वाले पहले पहले भारतीय हैं. वे भारत की उस महत्वाकांक्षा का भी प्रतीक हैं, जो अंतरिक्ष में वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
Axiom-4 मिशन विज्ञान, शिक्षा और अंतरिक्ष उद्योग के व्यावसायिक भविष्य को लेकर एक नया अध्याय खोल रहा है और उसमें भारत के शुभांशु शुक्ला की भूमिका ऐतिहासिक कही जा सकती है.











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