मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में संविदा सफाई कर्मचारी अभिषेक ने नगर पालिका परिषद के बाबू मेनपाल पर डेढ़ साल से वेतन रोके रखने का गंभीर आरोप लगाया है। अभिषेक ने अपनी शिकायत को लेकर अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह को एक प्रार्थना पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी आर्थिक तंगी और प्रशासनिक लापरवाही का जिक्र किया। इस मामले ने ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं को एक बार फिर उजागर किया है।
अभिषेक, जो नगरपालिका परिषद, मुजफ्फरनगर में ठेके पर सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं, ने बताया कि उनका वेतन पिछले डेढ़ साल से नहीं मिला है। इसके अलावा, हाल ही में ठेकेदार ने उनसे बड़ी गाड़ी चलवाने का काम कराया, जिसके दो महीने के वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया। अभिषेक ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ काम करने वाले अन्य कर्मचारियों को उनकी तनख्वाह मिल चुकी है, लेकिन उनका वेतन अभी तक उनके खाते में जमा नहीं हुआ।
अभिषेक ने अपने प्रार्थना पत्र में लिखा कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। उन्होंने बाबू मैनपाल पर वेतन रोकने और ठेकेदार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।
नगरपालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह ने इस मामले पर त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने बताया कि अभिषेक की शिकायत को गंभीरता से सुना गया है और मौके पर पटल अधिकारी को बुलाकर समस्या के निस्तारण के लिए निर्देश दिए गए हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि अभिषेक के बैंक खाते में कुछ तकनीकी समस्याएं थीं, जिसके कारण ठेकेदार द्वारा उनका वेतन उनके खाते में हस्तांतरित नहीं हो पाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस समस्या को जल्द से जल्द हल कर अभिषेक का बकाया वेतन उनके खाते में जमा कराया जाएगा।
यह मामला केवल एक कर्मचारी की व्यक्तिगत समस्या तक सीमित नहीं है। यह ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों के सामने आने वाली व्यवस्थागत खामियों, जैसे वेतन में देरी, पारदर्शिता की कमी, और प्रशासनिक लापरवाही को रेखांकित करता है। अभिषेक जैसे कर्मचारी, जो शहर की स्वच्छता के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, को समय पर वेतन न मिलना न केवल उनके परिवारों के लिए आर्थिक संकट पैदा करता है, बल्कि उनके मनोबल को भी तोड़ता है।
यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध करने की आवश्यकता है। साथ ही, समाज को भी ऐसे कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है, जो शहर की सफाई और व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।










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