मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘ कठमुल्ला ‘ वाले बयान को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठन उनकी आलोचना कर रहे हैं। इस बीच, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना मुकर्रम कासमी ने शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में प्रेस वार्ता की।
उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री को अपनी मर्यादा बनाए रखनी चाहिए और संविधान के अनुसार सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। मौलाना मुकर्रम कासमी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस्लाम को मानने वाले लोगों को ‘कठमुल्ला ‘ कह रहे हैं, लेकिन ये वही ‘कठमुल्ला’ हैं जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति दी थी।
उन्होंने बताया कि ये वही ‘कठमुल्ला” हैं जिन्होंने महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद भी वही ‘कठमुल्ला’ थे जो आजादी के बाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने थे। मदरसों में पढ़ने वाले उलेमा हमेशा आपसी भाईचारे को मजबूत करने का काम करते हैं।
मौलाना मुकर्रम कासमी ने रमजान के पवित्र महीने की शुरूआत पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हम अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करते हैं कि रमजान के इस पवित्र महीने में अल्लाह की इबादत करें, तरावीह का पालन करें और फिजूलखर्ची से बचें। साथ ही इस महीने में हमारे हिंदू भाइयों का होली का त्योहार भी है। हमें दोनों त्योहारों को एक साथ मनाना चाहिए और आपसी भाईचारे को मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि समाज में शांति और सद्भाव कायम रहे। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। भारत की आजादी में उलेमा और मदरसों का अहम योगदान रहा है।
हमें देश में नफरत नहीं बल्कि प्यार और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई हमारी तरफ एक हाथ बढ़ाता है, तो हम उसकी तरफ दस हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हैं। हमें आपसी भाईचारे के साथ रहना चाहिए, ताकि हमारे देश की छवि मजबूत बनी रहे।











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