मुज़फ्फरनगर। शहर के सर्कुलर रोड स्थित साउथ सिविल लाइंस क्षेत्र में एक रिहायशी मकान में अवैध रूप से चल रहे निरवाल अस्पताल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (MDA) के एक लिपिक पर रिश्वत मांगने और ध्वस्तीकरण आदेश की प्रति न देने का गंभीर आरोप लगाया है।
मोहल्ले वालों का कहना है कि अस्पताल में दिन-रात मरीज और उनके तीमारदार गली में खड़े रहते हैं, खुले में गंदगी करते हैं, शराब पीते हैं और महिलाओं-बच्चियों के लिए असुरक्षित माहौल बना हुआ है। इसके खिलाफ शिकायत करने पर MDA ने जांच की और पाया कि अस्पताल एक आवासीय भवन में अवैध रूप से संचालित हो रहा है। जांच के बाद प्राधिकरण ने अस्पताल के ध्वस्तीकरण (तोड़े जाने) का आदेश भी जारी कर दिया।
स्थानीय निवासी प्रभात पंवार ने बताया कि 21 अप्रैल 2025 को प्राधिकरण की ओर से अस्पताल के ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया। जब 22 अप्रैल को वे आदेश की प्रति लेने MDA कार्यालय पहुंचे, तो वहां तैनात बाबू ने उन्हें कॉपी देने से साफ इनकार कर दिया। पहले RTI डालने को कहा गया, जिसे उन्होंने तत्काल दाखिल भी कर दिया, लेकिन फिर भी आदेश की प्रति नहीं दी गई। उल्टा बाबू ने कथित रूप से रिश्वत की मांग करते हुए कहा, “कॉपी तो मिल जाएगी, लेकिन तरीका मालूम होना चाहिए।”
प्रभात ने आरोप लगाया कि उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में बैठाए रखा गया, लेकिन आदेश की प्रति नहीं दी गई। इस दौरान उनके साथ अभद्रता भी की गई। उन्होंने कहा कि RTI के जरिए जब अस्पताल के लाइसेंस और नक्शे की जानकारी मांगी गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि अस्पताल जिस भवन में चल रहा है, वह आवासीय नक्शे पर स्वीकृत है और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए गैरकानूनी है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि अस्पताल में आने वाले तीमारदार गली में ही खुले में पेशाब करते हैं, शराब पीते हैं और गंदगी फैलाते हैं। कई बार गली में ही गाड़ियों में बैठकर शराब पी जाती है, जिससे मोहल्ले का वातावरण बेहद असुरक्षित हो गया है। हमारी बेटियां घर से निकल नहीं सकतीं। ट्यूशन या बाज़ार भेजने से पहले गली का माहौल देखना पड़ता है,” एक महिला ने कहा।










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